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इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ा सकती है मोदी सरकार: ₹10 लाख तक की आय पर टैक्स छूट की उम्मीद, सेक्शन 80C में भी बदलाव संभव

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नई दिल्ली13 मिनट पहले

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चुनावी साल होने के चलते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को FY 2025 के लिए अंतरिम बजट पेश किया था। - Dainik Bhaskar

चुनावी साल होने के चलते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को FY 2025 के लिए अंतरिम बजट पेश किया था।

नरेंद्र मोदी सरकार वित्त वर्ष 2024-25 का पूर्ण बजट जुलाई के तीसरे सप्ताह में पेश कर सकती है। ऐसे में मिडिल क्लास और टैक्सपेयर्स को राहत मिलने की उम्मीद है। रॉयटर्स के मुताबिक, मोदी 3.0 अपने पहले बजट में ₹10 लाख सालाना कमाने वाले लोगों के लिए इनकम टैक्स की दरों में कटौती करने पर विचार कर रही है।

इसके अलावा सरकार इसके लिए इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव करने की प्लानिंग कर रही है। चुनावी साल होने के चलते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को FY 2025 के लिए अंतरिम बजट पेश किया था।

टैक्स छूट की सीमा ₹5 लाख कर सकती है सरकार
बजट में सरकार यह राहत एक खास सैलरी वर्ग और मिडिल क्लास को दे सकती है। वहीं, मनीकंट्रोल ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार बजट में इनकम टैक्स छूट की सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर सकती है। यह बदलाव केवल नई टैक्स रिजीम के तहत रिटर्न फाइल करने वालों पर लागू होगा।

नई टैक्स रिजीम में 3 लाख तक की आय टैक्स फ्री
मान लीजिए, किसी की सालाना इनकम 5 लाख रुपए है। नई टैक्स रिजीम में 3 लाख रुपए तक की आय टैक्स फ्री है। ऐसे में बचे हुए 2 लाख रुपए पर उस व्यक्ति पर 5% के हिसाब से टैक्स की देनदारी बनेगी। यानी, उसे 10,000 रुपए टैक्स चुकाना होगा। हालांकि, इस रिजीम में सरकार 7.5 लाख तक की इनकम पर टैक्स को सेक्शन 87A के तहत माफ कर देती है।

इसमें भी एक पेंच है। अगर आप सैलरीड है और आपकी कमाई 7.5 लाख रुपए से एक रुपए भी ज्यादा हुई तो आपको एक रुपए पर नहीं बल्कि 4,50,001 रुपए पर टैक्स चुकाना होगा। अब 3 लाख रुपए का टैक्स माफ होने के बाद बचे हुए 4,50001 रुपए में से 3 लाख रुपए पर 5% की दर से 15,000 रुपए और बाकी 1,50,001 रुपए पर 10% की दर से 15,000 रुपए चुकाने होंगे।

पुरानी टैक्स रिजीम में ₹10 लाख की इनकम पर 20% टैक्स
पुराने टैक्स रिजीम में इनकम टैक्स के टोटल 5 स्लैब हैं। इनमें ₹2.5 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री होती है। ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक की इनकम पर 5% टैक्स लगता है। वहीं, ₹5 लाख से ₹10 लाख की इनकम पर 20% टैक्स देना होता है। ₹10 लाख से ₹20 लाख तक की आय पर 30% टैक्स लगता है और ₹20 लाख से ऊपर कमाने वालों को 30% टैक्स चुकाना होता है। जबकि, नई टैक्स रिजीम में अभी तक 7 लाख रुपए तक की सैलरी टैक्स फ्री के दायरे में आती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बजट में 10 लाख रुपए तक की इनकम वाले स्ट्रक्चर में बदलाव की उम्मीद है। अभी 10 लाख तक की सैलरी पर सीधे 20 फीसदी टैक्स लगता है। सरकार इसमें बदलाव कर सकती है। 10 लाख तक की इनकम पर 20% टैक्स घटाकर 10% किया जा सकता है। इसके अलावा 30% वाले टैक्स स्लैब को बदलने पर भी विचार किया जा रहा है।

पुरानी टैक्स रिजीम को उदाहरण से समझें
भोपाल के CA कार्तिक गुप्ता के अनुसार मान लीजिए, अगर किसी की सालाना इनकम 5 लाख रुपए है। पुराने टैक्स रिजीम में 2.5 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है। ऐसे में बचे हुए 2.5 लाख रुपए पर उस व्यक्ति पर 5% के हिसाब से टैक्स की देनदारी बनेगी। यानी, उसे 12,500 रुपए टैक्स चुकाना होगा। पर सरकार इस टैक्स को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत माफ कर देती है।

इसमें एक पेंच भी है। अगर आपकी कमाई 5 लाख रुपए से एक रुपए भी ज्यादा हुई तो आपको एक रुपए पर नहीं बल्कि ढाई लाख एक रुपए पर टैक्स चुकाना होगा। अब 2.5 लाख रुपए पर 5% के हिसाब से 12,500 रुपए की टैक्स देनदारी बनेगी। वहीं बचे हुए 1 रुपए पर 20% के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। यानी, 12,501 रुपए टैक्स चुकाना होगा।

सेक्शन 80C की लिमिट में रिविजन की संभावना
महंगाई बढ़ने के बावजूद सरकार ने पिछले 10 साल में 80C की लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया है। क्लीयर टैक्स की फाउंडर और CEO अर्चित गुप्ता के मुताबिक, इसमें बदलाव से न केवल टैक्सपेयर्स को महंगाई से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि ELSS, टैक्स सेवर FDs, PPF जैसे सेविंग स्कीम्स में बचत और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

80C से 1.5 लाख तक के निवेश पर बचा सकते हैं टैक्स
कई लोग वित्त वर्ष खत्म होने से पहले टैक्स बचाने के लिए निवेश करना शुरू करते हैं। सेक्शन 80C के तहत, आपकी टोटल इनकम से 1.5 लाख रुपए की कटौती का दावा कर सकते हैं। आसान भाषा में, आप धारा 80C के माध्यम से अपनी टोटल टैक्सेबल इनकम से 1.50 लाख रुपए तक कम करा सकते हैं। टर्म इंश्योरेंस, 5 साल की FD और सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम्ससहित अन्य योजनाओं में निवेश करने पर इसका फायदा ले सकते हैं।

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