बीते मई महीने में भारत की खुदरा महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। सालाना आधार पर खुदरा महंगाई 12 महीने के निचले स्तर 4.75 प्रतिशत पर आ गई। वहीं, अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई के आंकड़े 4.83 प्रतिशत पर थे। एक साल पहले यानी मई 2023 में यह महंगाई 4.31 प्रतिशत रही थी। खुदरा महंगाई अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय दायरे के बीच है। रिजर्व इसको चार से छह प्रतिशत के बीच रखना चाह रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट तय की जा रही है।
क्या कहते हैं आंकड़े
मई में खाद्य मुद्रास्फीति दर अप्रैल के 8.75 प्रतिशत से घटकर 8.62 प्रतिशत हो गई। हालांकि, यह मई 2023 में दर्ज 3.3 प्रतिशत से अधिक रही है। ग्रामीण मुद्रास्फीति मई में 5.43 प्रतिशत से घटकर 5.28 प्रतिशत हो गई। वहीं, मई में शहरी मुद्रास्फीति दर 4.15 प्रतिशत थी। भारत के प्रमुख खाद्य पदार्थों के लिए महंगाई दर वार्षिक आधार पर मामूली रूप से कम होकर 27.3 प्रतिशत हो गई।
आरबीआई के प्रयास
बता दें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) महंगाई को काबू में रखने के लिए लगातार रेपो रेट को स्थिर बनाए हुए है। रेपो रेट 6.5 प्रतिशत पर बरकरार है। यह लगातार आठवीं बार है जब रेपो रेट को यथावत रखा गया है।
क्या कहा था आरबीआई गवर्नर ने
बीते दिनों एमपीसी यानी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा- एमपीसी ने इस बात पर गौर किया कि आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है जबकि मुख्य (कोर) मुद्रस्फीति में नरमी (ईंधन और खाद्य पदार्थ की महंगाई को छोड़कर) से खुदरा महंगाई में लगातार कमी आ रही है। इसके साथ ईंधन की महंगाई दर में कमी जारी है। हालांकि, खाद्य मुद्रास्फीति चिंता का विषय है और यह ऊंची बनी हुई है।
शक्तिकांत दास के मुताबिक केंद्रीय बैंक खासकर खाद्य महंगाई को लेकर सतर्क बना हुआ है। मौद्रिक नीति निश्चित रूप से महंगाई को काबू में लाने वाली होनी चाहिए और हम टिकाऊ आधार पर इसे 4 प्रतिशत के स्तर पर लाने को प्रतिबद्ध हैं।
