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10 मिनट पहले
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मेरा नाम अविनाश कुमार है और मैं फिलहाल THDC में पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के तौर पर काम कर रहा हूं। मैंने 2022 में NET JRF दिया था और पहले ही अटेम्प्ट में एग्जाम क्लियर किया। मेरे 204 मार्क्स आए थे। JRF क्वालिफाई करने के बाद मैंने यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद में PhD के लिए एडमिशन लिया। उसके बाद मैंने THDC में PR एग्जीक्यूटिव के तौर पर जॉइन किया, जो कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के मिनिस्ट्री ऑफ पावर की PSU है। यहां भी मेरा सिलेक्शन JRF के स्कोर के बेसिस पर ही हुआ।

8वीं क्लास में था जब शुरू किया ‘अपना बिहार’
मास कम्युनिकेशन से रिश्ता बचपन से है। शायद उस समय से जब पता भी नहीं था कि जर्नलिज्म होता क्या है। मैं बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक छोटे से गांव से हूं। शुरू से देखता था कि बिहार के बारे में बहुत नेगेटिव बातें होती थीं। कोई भी ऐसा प्लेटफॉर्म नहीं था जहां बिहार के बारे में अच्छी बातें मिल जाएं, जहां बिहार के बारे में कुछ पॉजिटिव चीजें जान पाएं। तब मैंने सोशल मीडिया पर एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने के बारे में सोचा जहां बिहार के बारे में पॉजिटिव चीजें मिले। तब मैंने ‘अपना बिहार’ शुरू किया। तब मैं 8वीं क्लास में था।
इंजीनियरिंग का सपना था, पर मास कम्युनिकेशन पढ़ा
11वीं-12वीं मैंने साइंस स्ट्रीम से की। सबकी तरह मेरा भी सपना था कि मैं इंजीनियर बनूं। IIT JEE की तैयारी करने लगा। इस बीच मुझे लगा कि मैं एक नेचुरल कम्युनिकेटर हूं तो मास कम्युनिकेशन एक बेहतर विकल्प रहेगा। उसी समय दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक पांच साल का इंटीग्रेटेड प्रोग्राम शुरू किया। मैंने एग्जाम दिया और मेरा सिलेक्शन हो गया। मैंने पांच साल वहां पढ़ाई की।

पहले ही अटेम्प्ट में JRF क्लियर किया
मास्टर्स के बाद पहले ही अटेम्प्ट में मैंने NET JRF क्लियर कर लिया। फिर PHd करने यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद आ गया। इसी दौरान THDC में PR एग्जीक्यूटिव का रिक्रूटमेंट निकला। उसमें NET-JRF के स्कोर की बेसिस पर कैंडिडेट्स को शॉर्टलिस्ट करते हैं और उसके बाद उनका इंटरव्यू लेते हैं। मुझे प्रोफाइल वगैरह अच्छी लगी। मैंने अप्लाई कर दिया और मेरा सिलेक्शन हो गया। वर्तमान में THDC इंडिया में PR एग्जीक्यूटिव का काम कर रहा हूं।
फॉर्मल तैयारी मास्टर्स के बाद शुरू की। मगर UGC NET का अगर सिलेबस देखें तो वो पूरा बैचलर्स और मास्टर्स का कंबाइंड सिलेबस होता है। मैं एकेडमिक्स में अच्छा था। जो उस समय पढ़ा था उसी का मेजर पोर्शन UGC NET के सिलेबस में भी था। कॉलेज में आप लोग इतना पढ़ चुके हैं कि आपको बेसिक्स आते ही होंगे। वो लोग कम्युनिकेशन थ्योरी, डेवलपमेंट कम्युनिकेशन वगैरह के बारे में पहले से ही जानते हैं।

UGC NET के लिए करें स्ट्रक्चर्ड तैयारी
UGC NET के लिए आपकी एक स्ट्रक्चर्ड तैयारी होनी चाहिए। सबसे पहले सिलेबस डाउनलोड कर लीजिए। किसको कितना पढ़ना है ये सब्जेक्टिव है। किसी भी कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए क्या पढ़ना है, इससे भी ज्यादा जरूरी है कि क्या नहीं पढ़ना है। ये भी सबके लिए अलग है क्योंकि मुझे जो टॉपिक आसान लगता हो जरूरी नहीं सभी को आसान लगे।
ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करें और उसी हिसाब से अपनी तैयारी डिजाइन करें। प्रीवियस ईयर क्वेश्चन पेपर्स और सैंपल पेपर्स सॉल्व करते रहें। उससे दो चीजें होंगी- एक तो ये पता चलेगा कि सवाल किस तरह के आते हैं। दूसरा आपको ये पता चलेगा कि किस टॉपिक को कितना डेप्थ में पढ़ना है। बहुत से क्वेश्चन्स रिपीट होते हैं, तो कुछ सवाल आपको यूं ही याद हो जाएंगे।
इसके अलावा पेपर सॉल्व करने के बाद उसका एनालिसिस जरूर करें। यूट्यूब चैनल्स से टॉपिक बाय टॉपिक मैराथन क्लास लगा सकते हैं। जिस टॉपिक में प्रॉब्लम होती है, जो समझ नहीं आता उसे यूट्यूब पर मैराथन क्लासेज में देख सकते हैं।
ChatGPT से समझ सकते हैं टॉपिक्स
अगर कोई टॉपिक समझने में दिक्कत हो रही है तो ChatGPT से समझ सकते हैं। ChatGPT से सीधे वो सवाल पूछें जो आपको कन्फ्यूज कर रहा हो। विकिपीडिया को लोग भरोसेमंद सोर्स नहीं मानते हैं। हालांकि मुझे लगता है कि विकिपीडिया पर 95% जानकारी सही होती है। जो जानकारी पब्लिक डोमेन में है, वो विकिपीडिया पर ठीक ही होती है।
मुश्किल टॉपिक्स के लिए काम आएंगे वीडियो लेक्चर्स
पेपर 1 में इंडियन लॉजिक थोड़ा मुश्किल है। उसमें संस्कृत के बहुत सारे कॉन्सेप्ट होते हैं। इसके लिए बुक से ज्यादा वीडियाे काम आएगा। डेटा इंटरप्रिटेशन यानी मैथ्स और रीजनिंग वाला पार्ट मुश्किल लगता है। बहुत से बच्चे जिनका मैथ्स का बैकग्राउंड नहीं है, उन्हें इस टॉपिक से डर लगता है। इसका एक ही सॉल्यूशन है- प्रैक्टिस। इसमें एक लंबी कैलकुलेशन करने से आप कई सवालों के जवाब दे सकते हैं।
रिसर्च एप्टीट्यूड और रिसर्च मैथोडोलॉजी, इससे पेपर 1 और 2 दोनों में सवाल आएंगे और ये बहुत जरूरी टॉपिक है। इनके लिए सी आर कोठारी की बुक से पढ़ सकते हैं। पेपर 1 काफी स्कोरिंग है, जितना ज्यादा पेपर 1 में स्कोर करेंगे, आपको पेपर 2 के लिए उतनी ही आसानी रहेगी।