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नेवी में भर्ती होने बॉम्बे गए थे मोतीलाल, बने हीरो: महात्मा गांधी ने की थी एक्टिंग की तारीफ, शराब-जुए की लत से हुए थे पाई-पाई को मोहताज

17 घंटे पहलेलेखक: कविता राजपूत

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दिलीप कुमार की ‘पैगाम’ हो, ‘देवदास’, या राजकपूर की ‘जागते रहो’। इन सब फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा जिसने मनवाया, वो थे बीते जमाने के बेहतरीन एक्टर मोतीलाल, जिनकी आज 59वीं डेथ एनिवर्सरी है।

मोतीलाल ने करीब तीन दशक तक हिंदी फिल्मों में काम किया। इस दौरान उन्होंने करीब 60 फिल्में कीं। 1955 में आई फिल्म ‘देवदास’ में इन्होंने चुन्नी बाबू का किरदार निभाकर पॉपुलैरिटी पाई।

अपनी बेहतरीन एक्टिंग के लिए उन्हें हिंदी फिल्मों का पहला नेचुरल एक्टर कहा गया। मोतीलाल नेवी में भर्ती होने के लिए बॉम्बे आए थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें फिल्मों में पहुंचा दिया।

1940 में आई फिल्म ‘अछूत’ में उन्होंने अछूत व्यक्ति का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल से भी तारीफें मिलीं।

मोहनलाल अपनी स्टाइल और निजी जिंदगी की वजह से ही चर्चा में रहे। वो काफी रईस खानदान से ताल्लुक रखते थे, लेकिन अंतिम समय में अपनी कुछ गलतियों के कारण पाई-पाई को मोहताज हो गए थे।

पर्सनल लाइफ की बात करें तो अपने जमाने की दिग्गज एक्ट्रेस शोभना समर्थ के साथ उनकी लव स्टोरी काफी मशहूर रही। 1965 में 54 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था।

मोतीलाल ने 30 से 60 तक के दशक में करीब 60 फिल्मों में काम किया था।

मोतीलाल ने 30 से 60 तक के दशक में करीब 60 फिल्मों में काम किया था।

चलिए नजर डालते हैं मोतीलाल की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प फैक्ट्स पर…

नेवी में भर्ती होने गए, मिल गई फिल्म
मोतीलाल का जन्म 4 दिसंबर 1910 को शिमला में हुआ था। उनके पिता जाने-माने एजुकेशनिस्ट थे, जिनकी तभी मौत हो गई थी जब मोतीलाल केवल एक साल के थे। मोतीलाल को उनके चाचा ने पाल-पोसकर बड़ा किया, जो दिल्ली के जाने-माने सर्जन थे।

मोतीलाल की शुरुआती पढ़ाई शिमला के इंग्लिश स्कूल में हुई। फिर बाद में उन्होंने दिल्ली से स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई की, क्योंकि चाचा उन्हें शिमला से दिल्ली ले आए थे।

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद मोतीलाल बॉम्बे आ गए। यहां वो आए तो नेवी जॉइन करने के लिए थे, लेकिन ऐन वक्त पर इतना बीमार पड़ गए कि टेस्ट ही नहीं दे पाए।

किस्मत को कुछ और ही मंजूर था तो एक दिन वो बॉम्बे के सागर स्टूडियो में शूट हो रही एक फिल्म की शूटिंग देखने जा पहुंचे। इसके डायरेक्टर केपी घोष थे, जो कि सागर प्रोडक्शन कंपनी के मालिक थे। केपी की नजर जब मोतीलाल पर पड़ी तो उनकी पर्सनालिटी से वे इम्प्रेस हो गए।

मोतीलाल को केपी घोष ने फिल्म ऑफर कर दी। उन्होंने 24 साल के मोतीलाल को फिल्म ‘शहर का जादू’ में हीरो बनने का ऑफर दिया। मोतीलाल को एक्टिंग के बारे में कुछ नहीं पता था, लेकिन केपी घोष के कहने पर उन्होंने फिल्म साइन कर ली।

फिल्म में मोतीलाल की एक्टिंग पसंद की गई और उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले। 1934 में ही उन्हें फिल्म वतन परस्त में भी देखा गया। इसके बाद भी बैक टु बैक वो सिल्वर किंग, डॉक्टर मधुरिका, दो घड़ी की मौज, लग्न बंधन, जीवन लता, दो दीवाने, दिलावर, कोकिला, कुलवधू, जागीरदार जैसी फिल्मों में दिखाई दिए।

1940 के आसपास मोतीलाल ने अपने किरदारों में एक्सपेरिमेंट करना शुरू किया। जहां बाकी एक्टर्स रोमांटिक छवि वाले रोल चुन रहे थे, वहीं मोतीलाल ने बोल्ड रोल चुनने शुरू किए जो बाकी एक्टर्स करने से हिचकिचाते थे।

मोतीलाल अपने करियर में 30 फिल्मों में लीड हीरो थे।

मोतीलाल अपने करियर में 30 फिल्मों में लीड हीरो थे।

जब महात्मा गांधी और वल्लभभाई पटेल ने की तारीफ
1940 में आई फिल्म ‘अछूत’ में मोतीलाल ने एक अछूत व्यक्ति का किरदार निभाकर सबको चौंका दिया। सामाजिक सन्देश देती इस फिल्म में मोतीलाल ने इतना जबरदस्त काम किया कि उन्हें महात्मा गांधी और वल्लभभाई पटेल जैसे दिग्गजों से सराहना मिली। इस फिल्म के बाद मोतीलाल का नाम फिल्म इंडस्ट्री के बड़े एक्टर्स की लिस्ट में शुमार किया जाने लगा।

मोतीलाल की एक बात उन्हें अन्य एक्टर्स से अलग बनाती थी और वो ये थी कि वो अपने किरदार को इतने नेचुरल तरीके से निभाते थे कि वो एक्टिंग लगती ही नहीं थी। इसी वजह से उन्हें हिंदी फिल्मों के पहले नेचुरल एक्टर की उपाधि दी गई।

उन्हें फिल्म ‘मिस्टर संपत’ में भी अपनी एक्टिंग के लिए खूब सराहना मिली, लेकिन 1955 में आई दिलीप कुमार स्टारर ‘देवदास’ से मोतीलाल का सितारा बुलंदियों पर पहुंच गया। इस फिल्म में उन्होंने चुन्नी बाबू का रोल निभाया था, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।

फिल्म 'देवदास' में वैजयंतीमाला, मोतीलाल और दिलीप कुमार।

फिल्म ‘देवदास’ में वैजयंतीमाला, मोतीलाल और दिलीप कुमार।

क्रिकेट मैच के दौरान एक्ट्रेस मीना शौरी और मोतीलाल।

क्रिकेट मैच के दौरान एक्ट्रेस मीना शौरी और मोतीलाल।

फिल्म इंडस्ट्री में थे मोतीलाल की रईसी के चर्चे
मोतीलाल ने पैसे कमाने के लिए फिल्मों में कदम नहीं रखा था। वो रईस खानदान से थे, इसलिए उन्हें पैसों की कोई कमी नहीं थी। उनकी लाइफस्टाइल भी इसकी गवाही देती थी। मोतीलाल हाई क्लास सोसाइटी में उठना-बैठना पसंद करते थे।

अपने बिंदासपन के लिए वो पूरी फिल्म इंडस्ट्री में मशहूर थे। हमेशा सूट-बूट में टिप टॉप रहने वाले मोतीलाल को हैट पहनने का भी बहुत शौक था। मोतीलाल को तेज रफ्तार में कार चलाने, हॉर्स राइडिंग और क्रिकेट खेलने का भी बहुत शौक था।

शूटिंग के दौरान भी ब्रेक मिलने पर वो को-स्टार्स के साथ क्रिकेट खेला करते थे। उन्हें प्लेन उड़ाने का भी शौक था, जिसके लिए उन्होंने बाकायदा लाइसेंस भी लिया था।

शोभना समर्थ और मोतीलाल।

शोभना समर्थ और मोतीलाल।

दो एक्ट्रेसेस के साथ रहा अफेयर, नहीं की शादी
मोतीलाल की बिंदास लाइफस्टाइल से कई एक्ट्रेसेस भी खासी इम्प्रेस रहती थीं, लेकिन पूरी फिल्म इंडस्ट्री में केवल दो एक्ट्रेसेस मोतीलाल का दिल जीतने में कामयाब हो पाईं। ये थीं शोभना समर्थ और नादिरा। नादिरा के साथ मोतीलाल रिलेशनशिप में रहे, लेकिन इन्होंने शादी नहीं की और फिर इनका ब्रेकअप हो गया। नादिरा से ब्रेकअप के बाद मोतीलाल शोभना समर्थ पर फिदा हो गए।

शोभना समर्थ से मोतीलाल की मुलाकात सागर फिल्म कंपनी की फिल्मों में काम करते हुए हुई थी। दोनों एक फिल्म की शूटिंग के दौरान मिले थे। जल्द ही दोनों अच्छे दोस्त बन गए। शोभना उस जमाने की दिग्गज अभिनेत्री थीं।

जब मोतीलाल से उनकी दोस्ती हुई तो वो शादीशुदा और चार बच्चों की मां थीं। शोभना की शादी कुमारसेन समर्थ से हुई थी, जिनसे उनके रिश्ते ठीक नहीं चल रहे थे।

शोभना समर्थ तनुजा की मां और काजोल की नानी थीं।

शोभना समर्थ तनुजा की मां और काजोल की नानी थीं।

शोभना मोतीलाल को केवल दोस्त की नजर से देखती थीं, लेकिन मोतीलाल शोभना पर फिदा थे। उन्हें उनके शादीशुदा और चार बच्चों की मां होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता था। आखिरकार शोभना की शादी सेन से टूट गई।

मोतीलाल ने उन्हें प्रपोज किया, लेकिन पहले तो वो नहीं मानीं, लेकिन काफी मनाने के बाद आखिरकार मोतीलाल का प्रपोजल शोभना ने स्वीकार कर लिया। दोनों ने शादी नहीं की, लेकिन इनकी नजदीकियां हमेशा चर्चा में रहीं।

अंतिम समय में हो गए पाई-पाई को मोहताज
मोतीलाल ने अपनी ज्यादातर जिंदगी रईसी में जी, लेकिन अपने आखिरी समय में वो परेशान रहे। दरअसल शराब और जुए की लत ने उन्हें बर्बाद कर दिया। उन्होंने घोड़ों की रेस पर भी खूब पैसे लगाए और गंवाए।

ज्यादा शराब पीने की वजह से 1960 के आसपास मोतीलाल की तबीयत खराब रहने लगी जिसके चलते उन्होंने फिल्मों में काम करना कम कर दिया। एक इंटरव्यू में मोतीलाल ने खुद खुलासा किया था कि उन्हें तीन हार्टअटैक आ चुके थे।

इस दौरान फिल्मों में एक्टिंग के बजाय मोतीलाल ने स्क्रिप्ट राइटिंग, डायरेक्शन और प्रोडक्शन की तरफ रुख किया। उन्होंने फिल्म ‘छोटी छोटी बातें’ लिखीं, प्रोड्यूस और डायरेक्ट भी की, लेकिन इसकी रिलीज से पहले ही वो चल बसे।

इस फिल्म के लिए उन्हें मरणोपरांत दो नेशनल अवॉर्ड दिए गए थे। 1965 में मोतीलाल ने एक भोजपुरी फिल्म में भी काम किया, जिसका नाम ‘सोलह सिंगार करे दुल्हनिया’ था। ये फिल्म उनके निधन से ठीक पहले रिलीज हुई थी। 17 जून 1965 को मोतीलाल का निधन हो गया था।

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