Stock Return: पीएम मोदी के पिछले 10 साल के कार्यकाल में कैपिटल गुड्स सेक्टर के कम से कम पांच शेयरों में 1,000% से अधिक की वृद्धि हुई है। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी, एफडीआई नार्म्स के उदारीकरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट पर निरंतर ध्यान ने कैपिटल गुड्स और औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा दिया है। पिछले 10 साल में 1,736% की तेजी के साथ टिमकेन इंडिया बीएसई कैपिटल गुड्स इंडेक्स में टॉपर के रूप में उभरा है। इसके बाद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (1,587% ), ग्रिंडवेल नॉर्टन (1,282% ) और हनीवेल ऑटोमेशन (1,259%) का स्थान है।
अल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट के हेड-क्वांट और फंड मैनेजर आलोक अग्रवाल ने कहा, “पिछले दशक में भारत में कई सुधारों और योजनाओं ने कंज्यूमर ड्यूराबेल्स, इंडस्ट्रियल, कैपिटल गुड्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर के डेवलपमेंट में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”
अग्रवाल ने कहा, “औद्योगिक और कैपिटल गुड्स बनाने वाली कंपनियों के लिए अब कारोबार करना आसान हो गया है, क्योंकि कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के लिए कई पहल की गई हैं, जिसमें नियमों का सरलीकरण, नौकरशाही की लालफीताशाही में कमी और कानूनी ढांचे में सुधार शामिल हैं।”
इन स्टॉक्स ने भी भरी उड़ान
डेटा के मुताबिक प्राज इंडस्ट्रीज, वी-गार्ड इंडस्ट्रीज, कार्बोरंडम यूनिवर्सल, शेफ़लर इंडिया, फिनोलेक्स केबल्स, एबीबी इंडिया, सीमेंस, कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल, एसकेएफ इंडिया और भारत फोर्ज जैसी कंपनियों ने भी इसी अवधि के दौरान 500% से 1,000% के बीच रिटर्न दिया है। दूसरी ओर बीएसई कैपिटल गुड्स इंडेक्स ने पिछले 10 वर्षों में 361% की बढ़त हासिल की।
केयर रेटिंग्स के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में चुनिंदा 21 सेक्टर्स में से 11 में शुद्ध बिक्री में दोहरे अंकों की वृद्धि देखी गई, और इसमें एविएशन, ऑटोमोबाइल, सीमेंट, कैपिटल गुड्स, इन्फ्रास्टक्चर, रियल्टी, हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र शामिल थे।
इन सेक्टर्स से काफी उम्मीदें
एलआईसी म्यूचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट के फंड मैनेजर और सीनियर इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट दीक्षित मित्तल ने कहा, “भारत में कैपेक्स में वृद्धि देखी जा रही है। बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन, डेटा सेंटर, रियल एस्टेट और रिन्युएबल एनर्जी में वैल्यू चेन में मौजूद कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों द्वारा अपनाई गई ‘चीन प्लस वन’ रणनीति भारतीय निर्यात में लांग टर्म ग्रोथ को गति दे सकती है। अमेरिका सहित कई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में चुनाव नजदीक होने के साथ, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी फेड और अन्य केंद्रीय बैंकों के संभावित रुख पर नजर रखनी चाहिए।

