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बिहार में महागठबंधन सरकार बनने और टूटने के बाद से सरकारी नौकरी और रोजगार सत्ता और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुआ है। नीतीश सरकार में जेडीयू के सीनियर मंत्री विजय कुमार चौधरी ने दावा किया है कि नीतीश सरकार ने 20 लाख नौकरी और रोजगार का वादा किया था लेकिन असल में वो 34 लाख नौकरी और रोजगार के लक्ष्य को पार करने जा रही है। गणित की भाषा में कहें तो विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार की सरकार वादा से 155 परसेंट ज्यादा जॉब और एम्प्लॉयमेंट डिलीवर करने जा रही है।
नीतीश ने सोमवार को नौकरी-रोजगार पर उच्चस्तरीय मीटिंग की जिसमें सात निश्चय पार्ट 2 के तहत 5.17 लाख नौकरी और 11 लाख रोजगार एक साल में देने का फैसला हुआ है। तीन महीने के अंदर 1.99 लाख चयनित कैंडिडेट को नौकरी का नियुक्ति पत्र देने की तैयारी चल रही है। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने पटना में मंगलवार को जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) दफ्तर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नीतीश सरकार ने युवाओं से किया वादा पूरा किया है।
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चौधरी ने कहा कि नीतीश सरकार ने 20 लाख नौकरी और रोजगार देने का वादा किया था लेकिन बिहार की सरकार 34 लाख नौकरी और रोजगार के लक्ष्य को पार करने जा रही है। चौधरी ने कहा कि सरकार ने 10 लाख नौकरी और 10 लाख रोजगार देने का ही वादा किया था लेकिन हमने 12 लाख नौकरी और 22 लाख रोजगार के अवसर नोटिफाई किए हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार ने हर साल नौकरी और रोजगार दिए। अगले एक साल के अंदर 5 लाख 17 हजार बेरोजगारों को सरकारी नौकरी दी जाएगी।
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जेडीयू मंत्री विजय चौधरी ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का बिना नाम लिए उन पर हमला किया और कहा कि वो नीतीश कुमार के काम का श्रेय लेने की कोशिश ना करें। एक सवाल के जवाब में चौधरी ने कहा कि रोजगार और नौकरी देने का का निर्णय सात निश्चय पार्ट 2 के तहत 2020 में एनडीए सरकार बनने के समय ही ले लिया गया था।
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जब पत्रकारों ने पूछा कि तेजस्वी ने कहा है कि महागठबंधन सरकार के 17 महीने के कार्यकाल में सरकारी नौकरी दी गई तो मंत्री ने पूछा कि क्या तेजस्वी यादव के पहले सरकारी नौकरी नहीं मिली या फिर तेजस्वी यादव के जाने के बाद सरकारी नौकरी नहीं मिल रही। चौधरी ने तेजस्वी यादव के दावे को हास्यास्पद बताया और कहा कि सच वे खुद भी जानते हैं।
