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भारत बोला- रूस भारतीयों की सेना में भर्ती बंद करे: यह दोनों देशों के रिश्तों के लिए सही नहीं; धोखे से यूक्रेन जंग लड़ने भेजे गए भरतीय

52 मिनट पहले

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भारतीयों को नौकरी का लालच देकर रूस भेजा गया और फिर रूस आर्मी में भर्ती कर लिया गया। (फाइल) - Dainik Bhaskar

भारतीयों को नौकरी का लालच देकर रूस भेजा गया और फिर रूस आर्मी में भर्ती कर लिया गया। (फाइल)

यूक्रेन जंग के बीच रूस की सेना में तैनात 2 और भारतीयों की मौत हो गई है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद भारत ने कहा है कि रूस हर हाल में अपनी सेना में भारतीयों को भर्ती करना बंद करे। यह दोनों देशों की पार्टनरशिप के लिए सही नहीं है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मॉस्को में भारतीय दूतावास ने दोनों भारतीय नागरिकों के शवों को जल्द से जल्द स्वदेश वापस लाने के लिए रूस के रक्षा मंत्रालय समेत रूसी अधिकारियों पर दबाव डाला है। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों की मौत पर दुख जताया है।

विदेश मंत्रालय ने भारतीयों को भी रूस में नौकरी का ऑफर मिलने पर सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने रूस से वहां की सेना में भर्ती भारतीयों को देश वापस भेजने की मांग की है। भारत में मौजूद रूस के राजदूत के सामने भी यह मुद्दा उठाया गया है।

वीडियो में दिख रहे 7 लोग पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले हैं। इन्होंने दावा किया कि सभी को जबरदस्ती यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए भेजा गया था।

वीडियो में दिख रहे 7 लोग पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले हैं। इन्होंने दावा किया कि सभी को जबरदस्ती यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए भेजा गया था।

CBI ने 4 आरोपियों को किया था गिरफ्तार
रूस की सेना में भर्ती कई भारतीय नागरिकों की अब तक मौत हो चुकी है। अप्रैल ने भारत की जांच एजेंसी CBI ने भारतीयों को धोखे से रूस-यूक्रेन जंग में भेजने के मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से तीन लोग भारत के थे, जबकि एक रूस के रक्षा मंत्रालय में काम करने वाला ट्रांसलेटर था।

ये सभी लोग एक नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसमें सोशल मीडिया के जरिए भारतीय को नौकरी और अच्छी सैलरी का लालच देकर फंसाया जाता है। CBI के मुताबिक, दिल्ली-बेस्ड एक वीजा कंपनी अब तक करीब 180 भारतीयों को रूस भेज चुकी है।

झांसा- 3 महीने की ट्रेनिंग के बाद मिलेगी 1 लाख की सैलरी
जांच एजेंसी ने बताया था कि वीजा कंसल्टेंसी कंपनियां उन लोगों को टारगेट करती हैं, जो विदेश में नौकरी करना चाहते हैं। इसके बाद इन्हें झांसा देने के लिए यूट्यूब वीडियो बनाए जाते हैं। इनमें दिखाया जाता है कि रूस में जंग का कोई असर नहीं है और सब सुरक्षित हैं। इसके बाद रूस की आर्मी में हेल्पर, क्लर्क और जंग में ढह चुकी इमारतों को खाली करने की जॉब में वेकेंसी दिखाई जाती है।

वीडियो में बताया जाता है कि नौकरी लेने वाले लोगों को बॉर्डर पर जंग लड़ने नहीं जाना होगा। उन्हें 3 महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिस दौरान 40 हजार रुपए की सैलेरी मिलेगी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद तनख्वाह 1 लाख रुपए हो जाएगी।

‘रूसी आर्मी में भर्ती नहीं हुए तो 10 साल की सजा होगी’
जब भारतीय झांसे में आकर रूस चले जाते हैं, तो उन्हें जबरदस्ती मिलिट्री ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें झूठे दस्तावेज दिखाए जाते हैं, जिस पर लिखा होता है कि अगर वे रूसी आर्मी में भर्ती नहीं हुए तो उन्हें 10 साल जेल की सजा हो जाएगी।

दिसंबर में 6 नेपाली मारे गए थे
दिसंबर 2023 में यूक्रेन के खिलाफ रूस की तरफ से लड़ते हुए 6 नेपाली मारे गए थे। यह खबर सामने आने के बाद नेपाल ने रूस से कहा था कि वो उसके नागरिकों का इस्तेमाल बंद करे। नेपाल के कई नौजवान पैसे की खातिर रूस के लिए जंग के मैदान में मौजूद हैं।

काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, मॉस्को ने कुछ महीने पहले जंग में मारे गए नेपालियों के परिवारों को मुआवजा देने पर सहमति जताई थी। जंग में अब तक 14 नेपाली मारे जा चुके हैं।

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