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मणिपुर के जिरिबाम के सैकड़ों लोग राहत शिविरों में हैं: सोशल मीडिया पोस्ट से जिरिबाम में भड़की हिंसा; 3 दिन में 150 घर फूंके

गुवाहाटी2 घंटे पहले

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मणिपुर के जिरिबाम में हिंसा के चलते यहां के करीब 600 लोग असम के कछार जिले में शरण लिए हुए हैं। - Dainik Bhaskar

मणिपुर के जिरिबाम में हिंसा के चलते यहां के करीब 600 लोग असम के कछार जिले में शरण लिए हुए हैं।

मणिपुर के जिरिबाम जिले में 6 जून की शाम से भड़की हिंसा को सुरक्षाबलों ने नियंत्रित कर लिया है, लेकिन इलाके में दहशत कायम है। जिरिबाम में कई जगहों पर धारा 144 लगी है। CRPF की 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं।

सैकड़ों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। 3 दिन में कुकी और मैतेई लोगों के 150 घर फूंक दिए गए हैं। करीब 2000 लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। मणिपुर में पिछले साल 3 मई से जारी हिंसा के बाद भी जिरिबाम जिला पूरी तरह शांत था, लेकिन एक युवक का शव मिलने के बाद सोशल मीडिया पर इसे जातीय हिंसा करार दे दिया गया।

कई सोशल मीडिया पोस्ट के बाद तनाव बढ़ गया और हिंसा शुरू हो गई। जिरिबाम जिला पुलिस के शीर्ष अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई अफवाह से यहां टकराव शुरू हुआ। पुलिस अब सोशल मीडिया अपडेट पर भी सक्रिय रूप से नजर रख रही है।

3 दिन में कुकी और मैतेई लोगों के 150 घर फूंक दिए गए हैं।

3 दिन में कुकी और मैतेई लोगों के 150 घर फूंक दिए गए हैं।

कुकी युवक और मैतेई बुजुर्ग का शव मिलने के बाद भड़की हिंसा
14 मई को 21 साल का कुकी युवक सौगौलेन सिंगसन उर्फ बोस्को जिरिबाम से लापता हो गया था। 3 दिन बाद इस युवक का शव जिरी नदी से बरामद हुआ। उसके बाद इलाके में तनाव फैलने लगा। कई समुदाय के लोगों को मिलाकर इलाके में शांति के लिए कमेटी बनाई गई। लेकिन 6 जून को जब जिरीबाम में 59 साल के एक मैतेई शख्स का शव बरामद हुआ तो जिले में हिंसा फैलनी शुरू हो गई।

मैतेई संगठनों का कहना है कि सोइबाम सरतकुमार सिंह 6 जून को अपने खेत पर गए थे, जिसके बाद वह लापता हो गए और बाद में उनका शव भारी जख्मों के साथ मिला था। मैतेई लोगों का आरोप है कि इलाके में सक्रिय उग्रवादियों ने सरतकुमार की हत्या कर दी। इस घटना के बाद सबसे पहले उग्र प्रदर्शनकारियों ने जिरिबाम नगर पालिका में कुछ कुकी घरों में आग लगाई थी।

जिरिबाम में घर छोड़कर निकले कई मैतेई लोग जंगलों में छिपकर बैठे हैं।

जिरिबाम में घर छोड़कर निकले कई मैतेई लोग जंगलों में छिपकर बैठे हैं।

UKLF के नेताओं के घर कंटीले तारों से घेरे गए
कक्चिंग जिले के सुग्नू में यूनाइटेड कुकी लिबरेशन फ्रंट (यूकेएलएफ) के फाइनेंस सेक्रेटरी खोमांग हाओकिप के घर को कंटीले तारों से घेरा गया। इसके पहले यूनाइटेड ट्राइबल लिबरेशन आर्मी (यूटीएलए) के अध्यक्ष का घर भी कंटीले तारों से घेरकर सुरक्षित करने की जानकारी मिली है।

जिरीबाम हिंसा के कारण असम के कछार जिले को हाई अलर्ट पर रखा गया है। असम के लखीमपुर से विधायक कौशिक राय ने बताया कि जिरीबाम से भागकर आए करीब 1000 लोगों ने कछार जिले में शरण ली हुई है। यह संख्या बढ़ती जा रही है। कुकी के अलावा मैतेई लोग भी असम में आए हैं। कछार के एसपी नुमाल महत्ता ने कहा कि लखीमपुर उप-मंडल में विशेष कमांडो तैनात किए गए हैं।

हिंसा से अछूता था जिरिबाम
3 मई 2023 से मणिपुर की इम्फाल घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी के बीच जातीय संघर्ष में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। मैतेई, मुस्लिम, नागा, कुकी और गैर-मणिपुरी समेत विविध जातीय संरचना वाला जिरिबाम अब तक जातीय संघर्ष से अछूता रहा था।

मणिपुर में 67 हजार लोग विस्थापित हुए
जिनेवा के इंटरनल डिस्प्लेसमेंट मॉनिटरिंग सेंटर (IDMC) ने रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि साल 2023 में साउथ एशिया में 69 हजार लोग विस्थापित हुए। इनमें से 97 फीसदी यानी 67 हजार लोग मणिपुर हिंसा के कारण विस्थापित हुए थे। रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत में साल 2018 के बाद हिंसा के कारण पहली बार इतनी बड़ी संख्या में विस्थापन देखने को मिला।

मार्च 2023 में मणिपुर हाईकोर्ट ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जाति (ST) में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को सिफारिशें भेजने के लिए कहा था। इसके बाद कुकी समुदाय ने राज्य के पहाड़ी जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

3 मई 2023 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। जो देखते ही देखते पूर्वी-पश्चिमी इंफाल, बिष्णुपुर, तेंगनुपाल और कांगपोकपी समेत अन्य जिलों में फैल गए थे।

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