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मायावती की खामोशी से चंद्रशेखर दलितों के नए नेता बने: नगीना के लोग बोले- संविधान-आरक्षण खतरे में इसलिए उसे चुना, जो भाजपा को हरा सके – Moradabad News

पश्चिम यूपी की नगीना लोकसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद की चौंकाने वाली जीत हुई। मायावती की सियासी खामोशी से दलितों को चंद्रशेखर के रूप में विकल्प मिला।

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नए समीकरणों में कभी बसपा का गढ़ रही नगीना सीट पर बसपा कैंडिडेट की जमानत तक जब्त हो गई। यूपी की इस सुरक्षित सीट पर 22% दलित वोटर्स ने नया ऑप्शन क्यों चुना, इसकी वजह समझने दैनिक भास्कर ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। पढ़िए रिपोर्ट…

नगीना के लोग बोले- चंद्रशेखर गरीब-मजदूर की सुनते हैं
नगीना में SDM ऑफिस के पास रोड साइड लस्सी का ठेला लगाने वाले मोहन कुमार सैनी चंद्रशेखर आजाद की बात करने पर जेब से एक विजिटिंग कार्ड निकालकर दिखाते हैं। कहते हैं- ये मुझे चंद्रशेखर ने दिया। उन्होंने मुझसे कहा है कि जब भी कोई दिक्कत हो सीधे इस नंबर पर कॉल करना। बेशक मैं सांसद बनूं या न बनूं, लेकिन आपके दुख-दर्द में हमेशा साथ रहूंगा। वो जिस तरह से बोलते हैं, वो मुझे उनकी ओर खींचता है। वो गरीब-मजदूर की आवाज सुनते हैं, उन्हें गले लगाते हैं। जो कोई भी बुलाता है, तुरंत चले आते हैं।

मोहन कुमार सैनी ने चंद्रशेखर का दिया हुआ विजिटिंग कार्ड दिखाया।

मोहन कुमार सैनी ने चंद्रशेखर का दिया हुआ विजिटिंग कार्ड दिखाया।

चंद्रशेखर का छोटे तबके से मिलना सबसे अच्छी बात
मोहन कुमार सैनी के नजदीक खड़े रवि कुमार कहते हैं- चंद्रशेखर की खासियत यह है कि वो छोटे तबके के लोगों से मेल-जोल रखते हैं। उनके अंदर हिंदू-मुस्लिम वाली कोई बात नहीं है। वो एक नया चेहरा थे, लोगों को लगा कि चलो इस बार इन पर भरोसा करते हैं। मैं भी उनसे मिल चुका हूं।

BJP छोटे कार्यकर्ताओं को इज्जत देती तो जीत जाती
नगीना में भाजपा के मंडल महामंत्री शिवचरन सैनी अपनी पार्टी के नेताओं से खफा दिखे। कहते हैं- चंद्रशेखर की जीत और भाजपा की हार का सिर्फ एक कारण है कि भाजपा नेताओं ने अपने छोटे कार्यकर्ताओं को इज्जत नहीं दी। उनकी बात नहीं मानी और बार-बार ग्राउंड की हकीकत बताने पर भी अनसुना करते रहे। उनकी एक नहीं सुनी, बड़े नेताओं की मीटिंग्स में छोटे कार्यकर्ताओं को अपमानित किया जाता रहा। उन्हें कुर्सी तक नसीब नहीं हुई।

ऊषा बोलीं- 500 रुपए दिए, फिर भी राशन कार्ड नहीं बना
नगीना में दान सहाय नगली गांव की रहने वाली ऊषा देवी सिस्टम से काफी गुस्सा दिखीं। कहती हैं- कोई सांसद -विधायक बने, गरीबों की कौन सुनता है? प्रधान अपनी मनमानी करते हैं। राशन कार्ड नहीं बनता, रोजगार नहीं मिलता। मेरे लड़के के 4 बच्चे हैं। उसका आज तक राशन कार्ड नहीं है, आयुष्मान कार्ड भी नहीं बना। सरकारी बाबू बार-बार नाम लिखकर ले जाते हैं। 500 रुपए दे दिए फिर भी राशन कार्ड नहीं बना। हम तो बस वोट देने के लिए हैं।

लोग बोले- नेताओं के बयान से संदेश गया कि संविधान बदल रहा
नगीना में नरेश सीमेंट की दुकान चलाते हैं। उनके भाई नगीना में एससी मोर्चा के पदाधिकारी हैं। नरेश कहते हैं- यहां लोग सोचते हैं कि चंद्रशेखर व्यक्ति ठीक हैं। पढ़े-लिखे हैं और सामाजिक भी हैं। आम जनता में भाजपा को लेकर नाराजगी थी। खुद भाजपा कार्यकर्ता भी नाराज दिखते थे। कार्यकर्ताओं के काम नहीं होते थे। तो वे आम आदमी की समस्या क्या दूर कराएंगे?

सबसे बड़ी बात यह थी कि कुछ भाजपा नेताओं के अनर्गल बयानों की वजह से ये संदेश गया कि संविधान बदलने की तैयारी है। यह लोग आरक्षण खत्म कर देंगे। ऐसा हो जाएगा जैसे सदियों पहले दलितों की हालत थी। ऐसे हालात में जनता का मन बदलते देर नहीं लगी।

VHP नेता बोले- संविधान बदलने के झूठे प्रचार से SC वोटर गुमराह हुआ
नगीना में विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार गर्ग का कहना है- प्रधानमंत्री का 400 पार का नारा नुकसानदेह रहा। नगीना में चंद्रशेखर ने दलितों के बीच ये अफवाह फैलाई कि भाजपा संविधान बदल देगी और आरक्षण खत्म कर देगी। भाजपा इस दुष्प्रचार को रोकने और दलित वोटरों को सही बात समझाने में नाकाम रही। भाजपा कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होना भी एक मुद्दा है।

सरकारी नौकरी वालों के आयुष्मान कार्ड बने, हमारे नहीं
धामपुर में जनरल स्टोर चलाने वाले सुधीर कुमार गुप्ता कहते हैं- हमारे पास कोई वोट मांगने ही नहीं आया। भाजपा अपने कामों की वजह से हारी। जिनके 6-8 बच्चे हैं, उन्हें सभी सुविधाएं हैं। गरीब सवर्णों के लिए कुछ भी नहीं है। हमारे पास आयुष्मान कार्ड तक नहीं है। जिनके घर में 4-4 सरकारी नौकरी वाले हैं, उनके आयुष्मान कार्ड बन गए।

चंद्रशेखर पैदल चले, BJP वाले गाड़ियों से नहीं उतरे
धामपुर में जनरल स्टोर चलाने वाले सोनू भाजपा नेताओं के तौर तरीकों से खासे खफा हैं। बोले- मैंने वोट भाजपा को दिया, लेकिन इनकी हरकतें अच्छी नहीं हैं। विधायक तो छोड़िए उनके कार्यकर्ता भी ब्रांडेड चश्मे लगाकर लग्जरी गाड़ियों से घूमते हैं, पब्लिक से मिलना पसंद नहीं करते।

कार्यालयों पर मीटिंगों में फोटो खिंचाते हैं। पब्लिक को दूर से गाड़ी में बैठे-बैठे हाथ हिलाकर हाय-बाय बोलकर चले जाते हैं। यहां कोई भाजपाई वोट मांगने नहीं आया।

इरशाद बोले- वो डरता नहीं, मुझे यही अच्छा लगता है
धामपुर के इरशाद अहमद कहते हैं- चंद्रशेखर को जहां चाहो, जब चाहो तुरंत बुला लो। एकदम गाड़ी लेकर तुरंत आ जाते हैं। थाना हो या कोई और जगह, जायज बात करते हैं और डरते नहीं हैं। भाजपा सरकार बुरी नहीं है, लेकिन इनके राज में कर्मचारी किसी की सुनते नहीं। महंगाई इतनी हो गई कि गरीब आदमी का रोटी खाना तक मुश्किल हो गया है।

चंद्रशेखर का कद जितना बढ़ेगा, उतना बसपा की मुश्किल बढ़ेगी
बिजनौर में मायावती के पहले चुनाव से लेकर पिछले कुछ वर्षों तक पूर्व सांसद वीर सिंह सबसे भरोसेमंद लोगों में रहे। वह इन दिनों भाजपा में हैं। वीर सिंह बताते हैं- मैं मायावती के शुरुआती दौर में साइकिल से उन्हें जनसभा स्थलों तक ले जाता था। मुझे नहीं लगता कि चंद्रशेखर आसानी से बहनजी का विकल्प बन सकते हैं। किसी पार्टी को खड़ा होने में दशकों का वक्त लगता है। बसपा को बनने में भी वक्त लगा था और कांशीरामजी ने बसपा के गठन से पहले वामसेफ के जरिए लोगों को जोड़ा था।

वह कहते हैं – इस जीत से चंद्रशेखर का कद जरूर बढ़ेगा और वो बसपा के लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे। उनके साथ दलित युवा जुड़ रहा है। ये बसपा के लिए खतरे की घंटी है। चंद्रशेखर नगीना सीट पर दलित-मुस्लिम कॉम्बिनेशन बनाने में कामयाब रहे। बसपा के लोग जहां हवाई किले बनाते रहे, वहीं चंद्रशेखर नगीना में दलित और मुस्लिमों के बीच पिछले एक साल से मेहनत कर रहे थे। चंद्रशेखर की दलित-मुस्लिम कॉम्बिनेशन की राजनीति वेस्ट यूपी में राजनीतिक समीकरण बदल सकती है।

वीर सिंह कहते हैं- नगीना में चंद्रशेखर की जीत के कई कारण हैं। उनमें से एक बड़ा कारण है मायावती के ऊपर लगा भाजपा का ठप्पा है। दलित समाज में एक मैसेज चला गया कि बहनजी भाजपा के लिए काम कर रही हैं। बसपा इस मैसेज को तोड़ नहीं सकी। दलितों का रुझान चंद्रशेखर की ओर देखकर मुस्लिमों ने सोचा कि भाजपा को वही हरा सकते हैं। चंद्रशेखर बोलने वाले नेता हैं। उन्होंने सरकार के खिलाफ भाषण और बयानबाजी करके मुस्लिमों को अपनी ओर खींच लिया।

नगीना वही सीट, जहां से मायावती ने करियर शुरू किया
वेस्ट यूपी की नगीना लोकसभा सीट से ही मायावती ने 1986 में पॉलिटिकल करियर की शुरुआत की थी। तब नगीना बिजनौर लोकसभा में आती थी। हालांकि चुनाव में वो पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के खिलाफ हार गई थीं। 1989 में मायावती यहीं से जीतकर सांसद बनीं और फिर यूपी में दलितों की सबसे बड़ी लीडर के रूप में अपनी पहचान बनाई। पक्के दलित वोट बैंक ने मायावती को 4 बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन अब इसी सीट का दलित वोट उनसे छिटकता नजर आ रहा है।

मायावती के गढ़ रहे नगीना ने अब एक नए दलित चेहरे चंद्रशेखर आजाद पर यकीन जताया है। मायावती के उम्मीदवार को दरकिनार कर यहां के दलित वोटर्स ने चंद्रशेखर को 1.50 लाख वोट मार्जिन से सांसद बनाया। जबकि मायावती के कैंडिडेट की जमानत जब्त हो गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या चंद्रशेखर पर दलितों का ये विश्वास सिर्फ नगीना तक ही सिमटा रहेगा? या फिर वो आने वाले समय में मायावती और बसपा का विकल्प बनकर उभर सकते हैं।

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