भास्कर ने अपनी खबर में बताया था कि राहुल रायबरेली और वायनाड में से किस सीट को और क्यों चुनेंगे।
राहुल गांधी केरल की वायनाड लोकसभा सीट से इस्तीफा देंगे और रायबरेली से सांसद बने रहेंगे। वायनाड से प्रियंका गांधी उपचुनाव लड़ेंगी। सोमवार को कांग्रेस की 2 घंटे की बैठक के बाद राहुल और खड़गे ने इसका ऐलान किया।
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राहुल ने कहा- वायनाड और रायबरेली से मेरा भावनात्मक रिश्ता है। मैं पिछले 5 साल से वायनाड से सांसद था। मैं लोगों को उनके प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूं। प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड से चुनाव लड़ेंगी, लेकिन मैं समय-समय पर वायनाड का दौरा भी करूंगा। मेरा रायबरेली से पुराना रिश्ता है, मुझे खुशी है कि मुझे फिर से उनका प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा, लेकिन यह एक कठिन निर्णय था।
वायनाड को राहुल की कमी महसूस नहीं होने दूंगी- प्रियंका
राहुल के ऐलान पर प्रियंका ने कहा, ‘मुझे वायनाड का प्रतिनिधित्व करने में बहुत खुशी होगी। मैं उन्हें उनकी (राहुल गांधी की) अनुपस्थिति महसूस नहीं होने दूंगी। मैं कड़ी मेहनत करूंगी। सभी को खुश करने और एक अच्छा प्रतिनिधि बनने की पूरी कोशिश करूंगी। मेरा रायबरेली और अमेठी से बहुत पुराना रिश्ता है, इसे तोड़ा नहीं जा सकता। मैं रायबरेली में भी अपने भाई की मदद करूंगी। हम दोनों रायबरेली और वायनाड में मौजूद रहेंगे।’

कांग्रेस नेताओं के घर 2 घंटे चली मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें ही राहुल के वायनाड छोड़ने का ऐलान हुआ।
खड़गे बोले- प्रियंका को लड़ाने का फैसला कांग्रेस पार्टी का
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- राहुल 2 लोकसभा सीटों से जीते हैं, लेकिन कानून के मुताबिक, उन्हें एक सीट खाली करनी होगी। राहुल रायबरेली सीट अपने पास रखेंगे और वायनाड लोकसभा सीट खाली करेंगे। हमने फैसला किया है कि प्रियंका वायनाड से चुनाव लड़ेंगी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर हुई कांग्रेस नेताओं की मीटिंग में सोनिया और प्रियंका भी मौजूद थीं।
भास्कर ने 10 दिन पहले ही बता दिया था कि राहुल रायबरेली सीट रखेंगे
राहुल ने अपने फैसले का ऐलान भले ही सोमवार को किया, लेकिन भास्कर ने 10 दिन पहले ही बता दिया था कि राहुल रायबरेली सीट अपने पास रखेंगे। बहन प्रियंका को वायनाड से चुनाव लड़ाया जाएगा।
भास्कर की खबर: रायबरेली नहीं छोड़ने पर राहुल सहमत, मां सोनिया ने समझाया
लगभग तय हो गया है कि राहुल गांधी मां सोनिया की सीट रायबरेली अपने पास रखेंगे। वे वायनाड छोड़ सकते हैं। बुधवार को हुई कांग्रेस की पहली बैठक और परिवार के साथ रायशुमारी के बाद उन्होंने यह फैसला किया।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल दोनों सीटों में से कौन सी सीट चुनें, उनके इस कन्फ्यूजन को सोनिया गांधी ने दूर किया। सोनिया ने राहुल को समझाया कि UP कांग्रेस के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए उन्हें रायबरेली अपने पास रखना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर

8 पॉइंट, राहुल की रायबरेली चुनने की वजह
- रायबरेली लोकसभा सीट गांधी परिवार का गढ़ है।
- गांधी परिवार के मुखिया ने हमेशा UP से ही राजनीति की। पिता राजीव गांधी अमेठी और परदादा जवाहरलाल नेहरू इलाहाबाद से चुनाव लड़ते रहे। रायबरेली सीट से मां सोनिया, दादी इंदिरा और दादा फिरोज गांधी सांसद रहे।
- रायबरेली की जीत इस लिहाज से भी बड़ी है कि परिवार ने अमेठी की खोई सीट भी हासिल कर ली।
- सोनिया गांधी ने सीट छोड़ते समय रायबरेली की जनता से कहा था- मैं अपना बेटा आपको सौंप रही हूं।
- परिवार के लोग भी यही चाह रहे थे कि राहुल रायबरेली का प्रतिनिधित्व करें।
- पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भी सलाह थी कि राहुल रायबरेली सीट अपने पास रखें।
- सोनिया ने राहुल को समझाया था कि UP कांग्रेस के लिए बेहद जरूरी है, इसलिए उन्हें रायबरेली अपने पास रखना चाहिए।
- कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव संचालन समिति के एक सदस्य ने बताया था कि CEC की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राहुल रायबरेली सीट पर बने रहें।

ये फोटो 17 मई की है। सोनिया गांधी ने लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक रैली रायबरेली में बेटे राहुल गांधी के लिए की थी।
कोई व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं हो सकता
संविधान के तहत कोई व्यक्ति एक साथ संसद के दोनों सदनों या संसद और राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं हो सकता। न ही एक सदन में एक से ज्यादा सीटों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। संविधान के अनुच्छेद 101 (1) में जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 68 (1) के तहत अगर कोई जनप्रतिनिधि 2 सीटों से चुनाव जीतता है, तो उसे रिजल्ट घोषित होने के 14 दिन के भीतर एक सीट छोड़नी होती है। अगर एक सीट नहीं छोड़ता है, तो उसकी दोनों सीटें रिक्त हो जाती हैं।
लोकसभा सीट छोड़ने के यह हैं नियम…
• अगर कोई सदस्य लोकसभा या किसी सीट से इस्तीफा देना चाहता है तो उसे सदन के स्पीकर को इस्तीफा भेजना होता है।
• नई संसद के गठन में अगर स्पीकर या डिप्टी स्पीकर नहीं है तो ऐसी स्थिति में प्रत्याशी इलेक्शन कमीशन को त्यागपत्र सौंपता है।
• इसके बाद इलेक्शन कमीशन रेजिग्नेशन लेटर की एक कॉपी सदन के सचिव को भेज देता है।
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गांधी परिवार 1952 से रायबरेली सीट जीतता आ रहा है। राहुल के दादा फिरोज गांधी, दादी इंदिरा गांधी और मां सोनिया गांधी पहले भी इस सीट से सांसद रह चुके हैं। इंदिरा के पति फिरोज गांधी ने 1952 में पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी।1980 के बाद से गांधी परिवार के वफादार अरुण नेहरू, शीला कौल और कैप्टन सतीश शर्मा ने 2004 तक रायबरेली से जीत हासिल की। इनके बाद सोनिया गांधी यहां से लड़ती रहीं और 2019 तक यहीं से सांसद रहीं। 2024 में राहुल गांधी ने यहां से जीत दर्ज की है। वो इस सीट को बरकरार रखेंगे। पढ़िए पूरी खबर..

