नई दिल्ली15 मिनट पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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ओम बिड़ला ने राजस्थान की कोटा बूंदी सीट से चुनाव लड़ा और जीता है।
लोकसभा के अंक गणित और सत्ता-विपक्ष के बीच जारी खींचतान को देखते हुए स्पीकर पद इस बार अहम हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार दो बड़े घटक दल टीडीपी और जदयू भी इस होड़ में शामिल दिख रहे हैं।
मोदी के दूसरे कार्यकाल में स्पीकर रहे कोटा सांसद ओम बिड़ला फिर दावेदारी में आगे हैं। उनके कैबिनेट मंत्री न बनने से अटकलें और जोर पकड़ चुकी हैं।
टीडीपी नेता एन चंद्रबाबू नायडू और जदयू नेता नीतीश कुमार को लगता है कि स्पीकर पद उस समय जीवन बीमा होगा, जब उनकी पार्टी में किसी प्रकार की तोड़फोड़ की कोशिश होगी।
अगर, स्पीकर पद TDP को पास जाता है तो उसे इंडी अलायंस इसे समर्थन देने तैयार है।

कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश बन सकते हैं प्रोटेम स्पीकर नई सरकार बनने पर सबसे पहले सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को लोकसभा का प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है। इस बार भाजपा के वीरेंद्र कुमार और कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश ऐसे दो सदस्य हैं, जो सबसे ज्यादा सातवीं बार चुने गए हैं। वीरेंद्र कुमार कैबिनेट में शामिल हैं। लिहाजा कांग्रेस के सुरेश प्रोटेम स्पीकर हो सकते हैं।
प्रोटेम स्पीकर सांसदों की शपथ करवाने के साथ ही स्पीकर का चुनाव करवाते हैं। स्पीकर का चुनाव साधारण बहुमत से होता है। पिछली लोकसभा में लोकसभा उपाध्यक्ष का पद खाली ही रहा था। इस बार यह पद भी एनडीए के किसी घटक दल को दिया जा सकता है।
अटल सरकार में TDP के पास था स्पीकर पद
एनडीए की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में स्पीकर पद टीडीपी के पास था। तब जीएमसी बालयोगी स्पीकर बने थे। उनके बेटे जीएम हरीश मधुर टीडीपी से चुनाव जीते हैं। टीडीपी उन्हें लोकसभा अध्यक्ष बनाकर दलित नेता को बड़े संवैधानिक पद पर ले जाने का श्रेय ले सकती है।

पुरंदेश्वरी के स्पीकर बनने की संभावना क्यों…
स्पीकर पद के लिए आंध्र प्रदेश की भाजपा अध्यक्ष डी. पुरंदेश्वरी का नाम भी चर्चा में है। पुरंदेश्वरी मनमोहन सरकार में मंत्री थीं। वे टीडीपी संस्थापक रामाराव की बेटी हैं। नायडू की पत्नी नारा भुवनेश्वरी उनकी बहन हैं। ऐसे में भाजपा उनके नाम पर नायडू को मना सकती है।

