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दिल्ली जल संकट पर SC में सुनवाई 12 जून को: कोर्ट ने कहा- अगर हम फाइलें नहीं पढ़ेंगे, तो मीडिया रिपोर्ट्स हमें प्रभावित कर सकती हैं

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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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तस्वीर दिल्ली के चाणक्यपुरी की है। तेज गर्मी के कारण लोगों को यहां पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। - Dainik Bhaskar

तस्वीर दिल्ली के चाणक्यपुरी की है। तेज गर्मी के कारण लोगों को यहां पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

दिल्ली जल संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई 12 जून तक टाल दी गई। कोर्ट ने कहा कि अगर हम फाइलें नहीं पढ़ेंगे, तो मीडिया रिपोर्ट्स हमें प्रभावित कर सकती हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने हिमाचल को दिल्ली के लिए एक्स्ट्रा पानी छोड़ने के लिए कहा था। हालांकि, AAP ने कहा कि यह पानी हरियाणा ने रोक दिया है।’

दरअसल, दिल्ली सरकार ने हरियाणा, हिमाचल और उत्तर प्रदेश को एक महीने तक एक्स्ट्रा पानी देने का निर्देश के लिए 31 मई को याचिका लगाई थी।

इस पर जस्टिस पीके मिश्रा और केवी विश्वनाथन की वेकेशन बेंच ने 6 जून को कहा था कि हिमाचल को एक्स्ट्रा पानी देने में कोई आपत्ति नहीं है, इसलिए वह अपस्ट्रीम से 137 क्यूसेक पानी 7 जून से दिल्ली के लिए छोड़े।

कोर्ट ने कहा था कि जब यह 137 क्यूसेक पानी हिमाचल द्वारा हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा जाए तो हरियाणा सरकार वजीराबाद तक पानी पहुंचाने में मदद करे, ताकि बिना बाधा के दिल्ली के लोगों को पानी मिल सके।

उधर, सुनवाई से पहले AAP की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हरियाणा सरकार ने नहीं किया है। हिमाचल से जो 137 क्यूसेक पानी आना था, वो हरियाणा सरकार ने नहीं आने दिया है।

इस एक्स्ट्रा पानी के हरियाणा को नियमित रूप से 1050 क्यूसेक पानी दिल्ली के लिए छोड़ना होता है, लेकिन हरियाणा उसमें से भी 200 क्यूसेक पानी कम दे रहा है। आज सुप्रीम कोर्ट में हम ये मामले को उठाएंगे।

दिल्ली के कई इलाकों में गर्मी के सीजन में लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।

दिल्ली के कई इलाकों में गर्मी के सीजन में लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।

दिल्ली में जल संकट क्यों हुआ
दिल्ली में जल संकट के दो कारण हैं- गर्मी और पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता। दिल्ली के पास अपना कोई जल स्रोत नहीं है। पानी के लिए यह पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक इस साल दिल्ली जरूरत हर दिन 32.1 करोड़ गैलन प्रति दिन पानी की कमी से जूझ रहा है।

दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक राज्य को रोजाना 129 करोड़ गैलन पानी की जरूरत है। लेकिन गर्मियों में केवल 96.9 करोड़ गैलन प्रति दिन ही मांग पूरी हो पा रही है। यानी दिल्ली की 2.30 करोड़ आबादी को हर दिन 129 करोड़ गैलन पानी चाहिए, लेकिन उसे सिर्फ 96.9 करोड़ गैलन पानी ही मिल रहा है।

दिल्ली को पानी इन राज्यों से मिलता है
दिल्ली में पानी की जरूरत हरियाणा सरकार यमुना नदी से, उत्तर प्रदेश सरकार गंगा नदी से और पंजाब सरकार भाखरा नांगल से मिले पानी से पूरी करती है। 2023 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली को हर दिन यमुना से 38.9 करोड़ गैलन, गंगा नदी से 25.3 करोड़ गैलन और भाखरा-नांगल से रावी-व्यास नदी से 22.1 करोड़ गैलन पानी मिलता था।

इसके अलावा कुंए, ट्यूबवेल और ग्राउंड वाटर से 9 करोड़ गैलन पानी आता था। यानी दिल्ली को हर दिन 95.3 करोड़ गैलन पानी मिलता था। 2024 के लिए यह आंकड़ा बढ़कर 96.9 करोड़ गैलन हो गया है।

जेल जाने से पहले केजरीवाल ने भी अपील की थी
दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने सरेंडर करने से पहले पानी की कमी से जूझ रही दिल्ली की जनता के लिए भारतीय जनता पार्टी से अपील की थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि BJP हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अपनी सरकारों से दिल्ली को एक महीने के लिए पानी देने के लिए कहे।

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