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कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से ऑनलाइन कक्षाएं लेने के लिए मजबूर हुए एफएमजी यानी विदेश से एमबीबीएस मेडिकल डिग्री लेकर भारत आने वाले छात्रों ने सोमवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। छात्र आयोग के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसमें उनकी इंटर्नशिप को दो से तीन साल तक करने की बात कही है। हाल ही में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया कि ऐसा देखा गया है कि विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र गलत तरीके से अपने संस्थानों से प्रतिपूरक प्रमाण पत्र हासिल कर रहे हैं। चिकित्सा पेशे में काम करने वाले लोग कुशल पेशेवर होने चाहिए। ऐसे में सही तरह से प्रशिक्षण प्राप्त न करने वाले मेडिकल स्नातक छात्रों के हाथ में लोगों की जिंदगी नहीं दी जा सकती।
विदेश में पढ़ाई के अपने सत्र के दौरान कुछ समय भी ऑनलाइन क्लास करने वाले मेडिकल स्नातक छात्रों को भारत में एफएमजी परीक्षा देने के अलावा दो से तीन साल तक की इंटर्नशिप करनी पड़ेगी।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के फैसले से कई मेडिकल छात्र नाराज हैं। प्रदर्शनकारी छात्र कुलदीप ने कहा कि वह यूक्रेन युद्ध की वजह से वापस भारत आ गए थे। तब से ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे थे। एक साल की इंटर्नशिप पूरी हो गई है, लेकिन आयोग के फैसले से उन्हें दो साल और इंटर्नशिप करनी पड़ेगी।
