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एमपी में ‘नमो दीदियों’ का ड्रोन बक्से में बंद: बोलीं- ई व्हिकल-जनरेटर नहीं मिले तो उड़ा नहीं पा रहे, कमाई भी नहीं हो रही – Madhya Pradesh News

‘ट्रेनिंग के वक्त कहा गया था कि ड्रोन को लाने और ले जाने के लिए ई व्हीकल और बैटरी चार्ज करने के लिए ई जनरेटर मिलेगा। इसके साथ 15 हजार रु. स्टाइपेंड भी मिलेगा। ट्रेनिंग किए हुए 4 महीने हो चुके हैं, लेकिन न तो ई व्हीकल मिला और न ही ई जनरेटर। कमाई भी कु

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ये कहना है झाबुआ की रहने वाली जया पाटीदार का। जया, केंद्र सरकार की नमो ड्रोन योजना के तहत प्रशिक्षित ड्रोन पायलट है, यानी ड्रोन दीदी है। उन्हें सरकार की तरफ से ड्रोन भी मिल चुका है मगर आज तक जया ने इसका इस्तेमाल नहीं किया है।

केंद्र सरकार की इस योजना के तहत एमपी की 89 महिलाओं को प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें 8 लाख रु. कीमत का ड्रोन 100 फीसदी सब्सिडी के साथ दिया गया। फर्टिलाइजर कंपनियों ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर फंड से ड्रोन बांटे, मगर इसके साथ ई व्हीकल और ई जनरेटर नहीं दिए। इस वजह से ड्रोन दीदी इनका इस्तेमाल ही नहीं कर पा रही हैं। केवल इफको की तरफ से 34 ड्रोन दीदियों को सारे इक्विपमेंट दिए गए हैं।

बता दें, एमपी में 11 मार्च 2024 को 89 महिलाओं को ड्रोन दिए गए थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली जुड़े थे। कार्यक्रम का आयोजन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पल्स रिसर्च सेंटर, फंदा में किया गया था।

दैनिक भास्कर ने प्रदेश की 10 ड्रोन दीदियों से बात कर समझा कि ड्रोन के साथ ई व्हीकल और जनरेटर न मिलने की वजह से वे किस तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। तो 5 बातें निकलकर सामने आई –

  • ड्रोन भारी है उसे लाने और ले जाने के लिए कंपनियों ने ई व्हीकल नहीं दिया।
  • बैटरी बैकअप 20 से 25 मिनट का है। ऐक्स्ट्रा बैटरी मिली है, लेकिन ई जनरेटर न होने से चार्ज करना मुश्किल है।
  • कई फसलों में सूरज ढलने के बाद ही कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं। रात में ड्रोन ऑपरेट करना मुश्किल होता है।
  • ड्रोन को लैंड होने और फ्लाई होने के लिए 10 फीट की जगह चाहिए होती है। खेत के बीच में इतनी खाली जगह नहीं मिलती।
  • खेतों की फेंसिंग और ऊपर से गुजरने वाली हाई टेंशन लाइन भी से भी ड्रोन को खतरा है।

इसी के साथ योजना का क्रियान्वयन करने वाले मप्र आजीविका मिशन के अधिकारियों से भी बात की तो पता चला कि उन्हें ही नहीं पता कि ये योजना आगे कैसे बढ़ेगी। इसे लेकर अधिकारियों को केंद्र सरकार की तरफ से कोई दिशा निर्देश ही नहीं मिले हैं। पढ़िए रिपोर्ट…

सबसे पहले जानिए मप्र में कैसे ऑपरेट हो रही योजना

मप्र में इस योजना का क्रियान्वयन करने वाले मप्र आजिविका मिशन के स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर मनीष सिंह पंवार कहते हैं कि केंद्र सरकार ने फर्टिलाइजर कंपनियों को ही ड्रोन दीदी योजना की नोडल एजेंसी बनाया है।

इन्हीं फर्टिलाइजर कंपनियों को अपने सीएसआर यानी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड से महिलाओं को ड्रोन बांटा है। मप्र में पांच कंपनियों ने 89 महिलाओं को ड्रोन बांटे हैं। ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग भी इन्हीं कंपनियों ने दी है।

मप्र आजिविका मिशन का काम सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) से ड्रोन पायलट के रूप में महिलाओं के चयन का है। वे कहते हैं कि ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण ले चुकी महिलाएं ड्रोन का इस्तेमाल कैसे करेंगी, उन्हें किस तरह से आय होगी, कितने एकड़ खेत में वे छिड़काव करेंगी। इसके नियमों को बनाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर एक कमेटी का गठन किया जाना था। लेकिन, अभी तक ऐसी कोई कमेटी बनी नहीं है।

अब पांच केस से समझिए किन चुनौतियों का सामना कर रहीं ड्रोन दीदियां

केस 1: ड्रोन दीदी सुहानी बोलीं- खराब क्वालिटी का मिला ड्रोन

नर्मदापुरम की ड्रोन दीदी सुहानी बताती है कि मेरी ट्रेनिंग ग्वालियर के द ड्रोन डेस्टिनेशन एकेडमी में हुई है। मेरे साथ 30 और दीदियों ने ट्रेनिंग ली थी। ट्रेनिंग के बाद हम सभी को कंपनी की तरफ से ड्रोन दिया गया।

मुझे इंडियन पोटाश लिमिटेड यानी आईपीएल कंपनी से ड्रोन मिला था। ड्रोन के साथ न तो ई व्हीकल दिया गया न ही बैटरी चार्ज करने के लिए ई-जनरेटर दिया। वे बताती हैं कि जो ड्रोन मिला है वो भी खराब क्वालिटी का है।

जिस ड्रोन से हमने ट्रेनिंग ली और जो ड्रोन दिया है, दोनों में काफी अंतर है। जो ड्रोन मिला है वह हवा में ही लड़खड़ाने लगता है। उसे कोई कमांड देते है तो वह बहुत देर में फॉलो करता है। सुहानी कहती है कि इसे लेकर मैंने कंपनी के अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद मैंने ड्रोन को बॉक्स में पैक कर रख दिया है।

केस 2: लीना बोलीं- किसानों को डेमो देने में खुद के 12 हजार खर्च हो गए

रायसेन की सखी सेल्फ समूह ग्रुप से जुड़ी लीना बताती है कि मेरी ट्रेनिंग IPL कंपनी ने कराई। ट्रेनिंग के बाद केवल ड्रोन दिया है। जब ई-व्हीकल(EV) के बारे में पूछा तो कंपनी के अधिकारी बोले कि हमारे पास सिर्फ ड्रोन का अप्रूवल है।

मैंने मप्र आजीविका मिशन के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि कंपनी को ड्रोन के साथ ईवी और जनरेटर देने के लिए भी अप्रूवल दिया गया है। आईपीएल कंपनी के अलावा इफको ने भी महिलाओं को ड्रोन दिए हैं।

मैंने उन दीदियों से बात की, जिन्हें इफको ने ड्रोन दिया, तो उन्होंने बताया कि इफको ने ड्रोन के साथ ई व्हीकल और जनरेटर भी दिया है। लीना कहती हैं कि मैंने आईपीएल कंपनी के अधिकारियों से 15 हजार रु. स्टाइपेंड और को-पायलट के बारे में भी बात की थी, तो उन्होंने कहा हम कुछ नहीं देंगे, जो भी देगी वो सरकार देगी।

वो कहती हैं कि मैं जिस क्षेत्र में रहती हूं वहां मूंग की फसल लगी हुई है। यहां के किसानों को केवल डेमो ही दे पा रही हूं। ड्रोन को खेत तक ले जाने के लिए प्राइवेट गाड़ी करना पड़ती है। इस पर मैं अब तक खुद का करीब 12 हजार रु. खर्च कर चुकी हूं।

ड्रोन से एक पैसे की भी कमाई नहीं हुई है। परिवार जितना सपोर्ट कर सकता था उसने किया, अब परिवार ने भी सपोर्ट करने से मना कर दिया है।

केस 3: EV न होने से घर में जगह घेर रहा है ड्रोन- जया पाटीदार

झाबुआ जिले के अमरगढ़ रेलवे स्टेशन के पास रहने वाली जया का कहना है कि ड्रोन दीदी बनने के बाद जो सोचा था, वैसा कुछ नहीं हुआ। फिलहाल आईपीएल कंपनी ने जो ड्रोन दिया है, वह अभी किसी काम नहीं आ रहा है। सिर्फ घर में जगह घेर रहा है।

हमें अभी ई व्हीकल भी नहीं मिला है। किराए की गाड़ी से ड्रोन लेकर जाना पड़ता है। गाड़ी वाले इतना भाड़ा लेते हैं, उतना तो ड्रोन से भी नहीं मिलता। मेरे पति ने पहले सपोर्ट किया, लेकिन इतनी समस्याएं हैं कि वो अपना काम देखेंगे या फिर मेरा काम।

जया बताती हैं कि इस समस्या को लेकर जब मैंने ट्रेनिंग ऑफिसर से बात की तो उन्होंने कहा कि एक आवेदन लिख कर ड्रोन वापस कर दो। हमने भी कहा कि हम लिखित में क्यों दे? आप ही हमें लिखित में दे दो कि आप ई व्हीकल और जनरेटर प्रोवाइड नहीं करा पाएंगे।

केस 4: किसान बुला रहे, मगर ई- व्हीकल न होने से जा नहीं पा रहे- भगवती

सीहोर की रहने ड्रोन दीदी भगवती कहती है कि मेरी ट्रेनिंग 18 से 31 दिसंबर तक ग्वालियर के माधव महाविद्यालय में हुई। मैं मप्र आजीविका मिशन से जुड़ी हूं, उसी से मुझे इस योजना के बारे में पता चला।

रजिस्ट्रेशन होने के बाद मुझे इफको की तरफ से कॉल आया, उन्होंने मेरा इंटरव्यू लिया। मुझसे पूछा कि खेती करना आता है तो मैंने कहा आता है। इसके बाद मेरा सिलेक्शन हो गया और ट्रेनिंग के लिए कॉल आया। मैं ग्रेजुएट हूं और अभी एमएसडब्ल्यू का कोर्स भी कर रही हूं।

भगवती ने कहा ड्रोन मिलने के बाद मैंने 25 एकड़ खेतों में स्प्रे किया है। इसमें से 5 एकड़ में डेमो दिया। बीस एकड़ से मैंने साढ़े सात हजार रु. कमाए, लेकिन ई व्हीकल न होने से ड्रोन ले जाने के लिए मुझे 5 हजार रु. किराए की गाड़ी को देना पड़े। मेरी बचत ढाई हजार रु. ही हुई।

केस 5 : गीता को इफको ने ड्रोन के साथ सारे इक्विपमेंट भी दिए

दतिया जिले की रहने वाली गीता कुशवाह को ड्रोन के साथ सारे इक्विपमेंट भी मिले हैं। वे कहती हैं कि इफको कंपनी ने ई व्हीकल के साथ जनरेटर और पूरा सामान दिया है। गीता बताती हैं कि मेरे गांव वालों के लिए ड्रोन एक नई चीज थी क्योंकि अभी तक तो उन्होंने ड्रोन सिर्फ शादी- ब्याह में देखा था।

गांव वालों ने कहा कि बहू ड्रोन लेकर आई है। 22 मार्च को जब ड्रोन मिला तो एक फील्ड ट्रेनिंग हुई। मैंने 5 एकड़ में ड्रोन स्प्रे भी किया था। 1 एकड़ में स्प्रे करने का हम लोग 300 रुपए चार्ज करते हैं। अभी खरीफ की फसल आएगी तब इसका ज्यादा इस्तेमाल होगा।

अधिकारी बोले- हमें तो सिर्फ ड्रोन बांटने के लिए कहा, क्या-क्या देना है हमें नहीं पता

इफको कंपनी ने जो ड्रोन बांटे उसमें ड्रोन दीदियों को ई व्हीकल और जनरेटर भी दिया है, बाकी कंपनियों ने नहीं दिया। इसे लेकर नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड( NFL) कंपनी के जोनल मैनेजर तेजिंदर सिंह का कहना है कि इफको ने ड्रोन दीदी को ड्रोन के साथ और क्या-क्या बांटा ये हमें नहीं पता।

हमारे पास केंद्र सरकार की तरफ से जो भी आदेश आए थे वो हमने फॉलो किए और ड्रोन बांट दिए। उसके बाद हमारे पास किसी तरह के आदेश नहीं आए। हम इस स्कीम के लिए न तो ऑथोराइज है न ही नोडल एजेंसी है।

हमें तो एक प्रोग्राम के लिए नॉमिनेट किया गया था। हमें तो ये भी जानकारी नहीं है कि इस योजना के लिए फंडिंग कंपनी के सीएसआर फंड से की जा रही है। उनसे पूछा कि इफको सारे इक्विपमेंट दे रही है तो वे बोले- ये इफको की मर्जी है।

मप्र आजीविका मिशन के अधिकारी बोले- कंपनी तय करेगी उसे क्या देना है

इस बारे में मप्र आजीविका मिशन के स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर मनीष सिंह पंवार कहते हैं कि ड्रोन बांटते समय यह तय नहीं किया गया था कि महिलाओं को ड्रोन के साथ और क्या इक्विपमेंट दिए जाएंगे। बाद में जब फर्टिलाइजर कंपनियों के अधिकारियों से बात हुई तो उन्होंने कहा कि ड्रोन के साथ बैटरी दी जाएगी।

इफको ने ड्रोन के साथ ईवी और जनरेटर देने का फैसला किया। बाकी कंपनियां NFL, CFSL, IPL, PPL ने सिर्फ ड्रोन ही दिया गया है। लेकिन, अगर पूरा पैकेज देखा जाए तो ड्रोन के साथ ईवी और जनरेटर देना काफी हद तक ड्रोन दीदियों के लिए बेहतर होगा।

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