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मेडिकल संस्थानों अब अपनी मर्जी से नॉन पीजी जेआर (एमबीबीएस डॉक्टर या जूनियर रेजिडेंट) की तैनाती नहीं कर सकेंगे। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय की तरफ से मेडिकल संस्थानों में नॉन पीजी जेआर की तैनाती होगी। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लखनऊ के केजीएमयू, लोहिया, कैंसर संस्थान समेत दूसरे मेडिकल संस्थानों में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय की तरफ से नॉन पीजी जेआर की तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लोहिया संस्थान के सीएमएस डॉ. एके सिंह का कहना है कि अब तक 86 नॉन पीजी जेआर तैनात किए जा चुके हैं। संस्थान में 146 नॉन पीजी जेआर के पद स्वीकृत हैं।
केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक 112 नॉन पीजी जेआर तैनात किए जा चुके हैं। चक गंजरिया स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में 55 पदों के मुकाबले 32 नॉन पीजी जेआर की तैनाती महानिदेशालय ने की है। इन डॉक्टरों की तैनाती दो साल के लिए की गई है। एमबीबीएस में दाखिले के वक्त छात्रों से बांड भराया गया था। जिसके तहत एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी होने के बाद दो साल सरकारी संस्थानों में सेवा देना जरूरी किया गया है।
ये आ रही अड़चन
कई मेडिकल संस्थानों में दो से तीन माह पहले ही नॉन पीजी जेआर की भर्ती की थी। ऐसे में महानिदेशालय से एमबीबीएस डॉक्टरों के आने से संस्थान में पहले से कार्यरत डॉक्टरों को हटाना पड़ेगा। वहीं कई संस्थानों में पद से कम एमबीबीएस डॉक्टर भेजे गए हैं। लिहाजा पहले से तैनात व महानिदेशालय से भेजे गए डॉक्टर एक साथ काम करेंगे। दोहरी व्यवस्था से बदइंतजामी की आशंका है।
