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नई दिल्ली1 घंटे पहले
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प्रेरणा स्थल में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ खड़े सांसद व केंद्रीय मंत्री।
राज्यसभा अध्यक्ष और उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को संसद परिसर में प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। प्रेरणा स्थल में सभी राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां रखी जाएंगीं, जो पहले परिसर में अलग-अलग जगह रखी हुई थीं।
कांग्रेस ने इस कदम को सरकार की मनमानी बताया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि परिसर में लगी मूर्तियों को उनकी जगह से हटाकर दूसरी जगह लगाने का फैसला सरकार ने बिना किसी से पूछे लिया है। ऐसा करना संसद के नियमों और परंपराओं के खिलाफ है। यह लोकतंत्र का उल्लंघन है।

प्रेरणा स्थल का उद्घाटन करते उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़। उनके साथ पूर्व लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव।
लोकसभा सेक्रेटेरिएट ने कहा- पर्यटक सभी मूर्तियों को देख नहीं पाते थे
उद्घाटन के दौरान धनखड़ ने कहा कि प्रेरणा स्थल लोगों को प्रेरित करेगा और उत्साह देगा। धनखड़ ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रेरणा स्थल का उद्घाटन करके देश को बनाने वाले लीडर्स और महान विभूतियों को श्रद्धांजलि देने का मौका मिलेगा।
लोक सभा सेक्रेटेरिएट ने कहा कि पहले मूर्तियां पूरे परिसर में अलग-अलग जगह लगी हुई थीं, जिससे पर्यटक उन्हें ठीक से देख नहीं पाते थे। वहीं पूर्व लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने रिपोर्ट्स को बताया कि अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ समय-समय पर चर्चाएं हुई हैं। इस मामले में राजनीति करने की जरूरत नहीं है।

बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर खड़े उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़।
खड़गे ने कहा- प्रतिमाओं को उनकी जगह से हटाना लोकतंत्र के खिलाफ
खड़गे ने इस मामले में एक स्टेटमेंट जारी कर कहा कि महात्मा गांधी, बीआर अंबेडकर, छत्रपति शिवाजी महाराज समेत कई बड़े लीडर्स की मूर्तियों को पार्लियामेंट हाउस कॉम्प्लेक्स में उनकी खास जगह से हटाकर एक कोने में रख दिया गया है। बिना किसी से चर्चा किए, मनमाने तरीके से मूर्तियों को हटाना लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है।
पूरे संसद परिसर में ऐसी करीब 50 प्रतिमाएं हैं। महात्मा गांधी, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर और अन्य दिग्गज लीडर्स की प्रतिमाओं को बहुत सोच-विचार करने के बाद उनकी विशेष जगहों पर रखा गया था। हर प्रतिमा और संसद परिसर में उसकी लोकेशन अपने आप में बहुत मायने रखती है।
उन्होंने कहा कि पुरानी संसद के ठीक सामने महात्मा गांधी की ध्यानमुद्रा वाली प्रतिमा देश की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए बेहद अहमियत रखती थी। सांसद महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महात्मा गांधी के विचारों को अपनाने की कोशिश करते थे। इसी जगह पर सांसद शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करते थे। सरकार ने इन मूर्तियों इसलिए दूसरी जगह लगाया है ताकि विपक्षी सांसद संसद के पास शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन न कर सकें।
खड़गे ने कहा कि बाबासाहेब की मूर्ति भी ऐसी जगह लगाई गई थी जहां से ये संदेश मिलता था कि बाबा साहेब सांसदों की पीढ़ियों को संविधान में निहित मूल्यों और सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पहले जहां उनकी मूर्ति लगी थी, वहां उनकी जयंती और पुण्यितिथि पर उन्हें सभी लोग आसानी से श्रद्धांजलि दे पाते थे। एक मनमाने फैसले से इस सबको खत्म कर दिया गया है।
खड़गे ने कहा कि संसद परिसर में राष्ट्रीय नेताओं की तस्वीरें और प्रतिमाएं लगाने के लिए एक पैनल है, जिसमें दोनों सदनों के सांसदों को शामिल किया जाता है। हालांकि इस पैनल को 2019 के बाद से पुनर्गठित नहीं किया गया है। सभी सांसदों से चर्चा किए बिना ऐसा फैसला लेना संसद के नियमों और परंपराओं के खिलाफ है।
जयराम रमेश ने भी इस कदम को गलत बताया
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा वेबसाइट के मुताबिक संसद की कमेटी ऑन पोर्टेट एंड स्टैच्यू पिछली बार 18 दिसंबर 2018 को मिली थी। 17वीं लोकसभा (2019-2024) में इसे पुनर्गठित भी नहीं किया गया था। पिछली लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का संवैधानिक पद भी खाली छोड़ दिया गया था।
आज संसद परिसर में जो बदलाव किए गए उनका एक ही उद्देश्य था- जहां संसद बैठती है और जहां पारंपरिक रूप से सांसद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करते आए हैं वहां से महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर की प्रतिमाएं हटाना।

