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अमेरिकी पेसर बोले- टीम का सुपर-8 में पहुंचना सपने जैसा: सौरभ के सुपर ओवर से US पाकिस्तान से जीता था, पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर

स्पोर्ट्स डेस्क2 दिन पहले

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अमेरिका के लिए टी-20 वर्ल्ड कप में खेल रहे भारतीय मूल के फास्ट बॉलर सौरभ नेत्रवल्कर का नाम सुर्खियों में है। शुक्रवार को इस टीम का आयरलैंड के साथ मैच रद्द हो जाने के कारण पॉइंट्स के अंतर के चलते सौरभ की टीम सुपर-8 स्टेज के लिए क्वालिफाई कर गई।

अमेरिका की इस सक्सेस के पीछे सौरभ का बड़ा रोल है। 32 साल के इस गेंदबाज ने भारत के खिलाफ मैच में टीम इंडिया के टॉप बैटर रोहित शर्मा और विराट कोहली को पवेलियन भेजा। वहीं, पाकिस्तान के खिलाफ सुपर ओवर में 19 रन डिफेंड करके टीम को मैच जिताया।

सौरभ पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वे अमेरिका में ही नौकरी करते हैं। उनका मानना है कि अमेरिका के लिए सुपर-8 में पहुंचना बहुत बड़ी बात है। इससे अमेरिका में क्रिकेट को ज्यादा बढ़ावा मिलेगा।

दैनिक भास्कर ने सौरभ नेत्रवल्कर से बातचीत की। इंटरव्यू के कुछ मुख्य अंश….

1. अगले राउंड में जाकर कैसा लग रहा है? आपकी लाइफ में क्रिकेट के क्या मायने हैं?
सौरभ- व्यक्तिगत रूप से मैं वास्तव में उत्साहित हूं। मैं हर उस पल का आनंद लेता हूं जब मुझे खेलने का मौका मिलता है, हर उस पल का जब मैं जर्सी पहनकर मैदान में उतरता हूं क्योंकि ऐसा लगता है कि जीवन ने मुझे वह करने का दूसरा मौका दिया है जो मुझे पसंद है। मैं हर चीज के लिए आभारी हूं।

नतीजों के बारे में नहीं सोच रहा हूं, लेकिन मैं हर मोमेंट को एंजॉय करने की कोशिश कर रहा हूं और यह वाकई स्पेशल बन रहा है।

2. एक इंटरव्यू में आपने कहा था कि आपने इस टूर्नामेंट के लिए ऑफिस से छुट्टी ली है। क्या आपने सुपर स्टेज के लिए अपनी छुट्टी बढ़ा दी है?
सौरभ-
मेरे ऑफिस के सभी लोग मुझे सपोर्ट कर रहे हैं। मैं उन सभी का बहुत आभारी हूं।

3. इस बार अमेरिका में पिचें हाई स्कोरिंग नहीं हैं, जैसा कि हम भारत में अपने घर में देखते हैं। ऐसे विकेट पर क्या चैलेंज रहते हैं?
सौरभ- मुझे लगता है कि डलास में खेले गए पहले दो मैच बल्लेबाजी के लिए भी अच्छे थे। टूर्नामेंट का पहला मैच हाईस्कोरिंग था, दोनों टीमों (कनाडा-अमेरिका) ने 190+ रन बनाए थे, जबकि पाकिस्तान के खिलाफ भी 160 रन बने थे।

हालांकि न्यूयॉर्क की पिच गेंदबाजों के लिए थोड़ी ज्यादा मददगार थी। हेल्पफुल कंडीशंस में यह मायने रखता है कि गेंदबाज बेसिक्स पर कितना टिकते हैं। ऐसी पिचों पर आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है क्योंकि पिच आपकी मदद कर रही है, बस आप अच्छी लेंथ पर गेंदबाजी करें, आपको रिजल्ट मिलेंगे।

4. आप रणजी ट्रॉफी में सूर्यकुमार यादव के साथ खेले, तो आपने मैच के बाद कुछ यादें ताजा कीं?
सौरभ- जरूर, हम लगभग 10-12 साल बाद मिले। लगा नहीं कि इतना समय हो गया है। हम वैसे ही मिले जैसे पहले मिलते थे। मैं उनकी सक्सेस के लिए खुश हूं। वे कई चुनौतियों का सामना करके यहां तक पहुंचे हैं। वे बेस्ट टी-20 बैटर्स में से एक हैं। मुझे लाइव उनकी इनिंग्स देखने का मौका मिला, जो कि अच्छा था।

सूर्यकुमार यादव के साथ सौरभ नेत्रवल्कर।

सूर्यकुमार यादव के साथ सौरभ नेत्रवल्कर।

5. आपकी टीम अगले राउंड के लिए क्वालिफाई कर गई है, अमेरिकी क्रिकेट के लिए इसके क्या मायने हैं। चूंकि क्रिकेट लॉस एंजिलिस ओलिंपिक 2028 का भी हिस्सा बनने जा रहा है।
सौरभ- हमारे लिए यह ऐतिहासिक मोमेंट है क्योंकि पहली बार हम इस तरह के टूर्नामेंट की सह-मेजबानी कर रहे हैं। हमने देखा है कि हमारे फैंस ने हमारा समर्थन करने के लिए इतनी बड़ी संख्या में टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है। वहीं, मीडिया भी इसे कवर कर रहा है। बहुत से लोग खेल के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं, यह अपने आप में हमारे लिए एक बड़ी जीत है।

अब सुपर 8 के लिए क्वालिफाई करना और भी बड़ी उपलब्धि है। मुझे लगता है कि इससे निश्चित रूप से अमेरिका में यह खेल तेजी से आगे बढ़ेगा। उम्मीद है कि कुछ युवा अब इस देश में बैट और बॉल उठाए दिखेंगे।

6. पाकिस्तान के खिलाफ सुपर-ओवर करते समय दिमाग में क्या चल रहा था?
सौरभ- सुपर ओवर तक गेम लाना ही बड़ी बात थी। हमारे बल्लेबाजों की बदौलत यह हुआ। हमने सुपरओवर में चतुराई से ओवरथ्रो के रन लिए। 19 रन अच्छा टोटल होता है। बॉलिंग में प्लान था कि 3 बॉल अच्छे से करनी है, इससे मैच हमारे पाले में आ गया।

मैं अपने कप्तान और कोच का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मुझे बॉल थमाई और भरोसा दिखाया। पहली बॉल डालने से पहले मैं नर्वस था। मैं अपने प्लान पर अडिग था। अगर मैं कोशिश करने के बाद हार जाता तो मुझे अफसोस नहीं होता, क्योंकि मैंने अपना बेस्ट दिया था। यह एक टीम एफर्ट था। मुझे अच्छा लगा।

पाकिस्तान से मुकाबले के बाद सौरभ की पोस्ट…

7. क्या आप पाकिस्तान के खिलाफ अपने प्रदर्शन को भारत के खिलाफ किए प्रदर्शन से बेहतर मानेंगे?
सौरभ- मुझे लगता है कि दोनों ही खास हैं क्योंकि दोनों ही अलग-अलग परिस्थितियां थीं। इंडिया के खिलाफ न्यू बॉल स्पेल था। यहां लेंथ बॉल को स्विंग कराने की चुनौती थी। जबकि पाकिस्तान के खिलाफ मेरे ऊपर प्रेशर था। मुझे प्रेशर से निपटना था। यहां मैं दोनों टेस्ट में पास हो गया।

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