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वाराणसी में बन रहे स्टेडियम में अचानक पहुंचे PM मोदी, इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का किया निरीक्षण

काशी में दिन भर के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री मोदी अचानक वाराणसी में स्टेडियम और खेल परिसर के निर्माण के लिए चल रहे काम की समीक्षा करने पहुंचे. यहां उन्होंने बन रहे इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निरीक्षण किया. इस दौरान उनके साथ सीएम योगी भी मौजूद रहे. ये स्टेडियम एक बार तैयार हो जाने पर यह युवाओं की जरूरतों को पूरा करेगा और वाराणसी में खेल संस्कृति को और बढ़ाएगा. अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी रात को बनारस रेलवे इंजन फैक्ट्री के गेस्टहाउस में रुकेंगे. इसके बाद बुधवार को बिहार के लिए रवाना होंगे.

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और लोकसभा चुनाव के बाद अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के पहले दौरे में भगवान का आशीर्वाद लिया. मंदिर में दर्शन से पहले मोदी ने मेहंदीगंज में प्रधानमंत्री किसान सम्मान सम्मेलन को संबोधित किया और दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में भाग लिया. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी प्रधानमंत्री के साथ मंदिर में मौजूद रहे.  

पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मैंने काशी विश्वनाथ मंदिर में भारत की प्रगति और 140 करोड़ भारतीयों की समृद्धि के लिए प्रार्थना की. महादेव का आशीर्वाद हम सभी पर हमेशा बना रहे और सभी खुश और स्वस्थ रहें.” उन्होंने एक्स पर हिंदी में एक अन्य पोस्ट में कहा, “मैंने बाबा से सभी नागरिकों की खुशी, शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की.” 

वाराणसी के घाट पर पीएम मोदी गंगा आरती की

नालंदा यूनिवर्सिटी के नए परिसर का उद्घाटन करेंगे पीएम

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन करेंगे. जानकारी के मुताबिक परिसर के उद्घाटन के लिए आयोजित कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर और 17 देशों के राजदूतों के शामिल होने की उम्मीद है. विश्वविद्यालय का नया परिसर नालंदा के प्राचीन खंडहरों के स्थल के करीब है. इस विश्वविद्यालय की स्थापना नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी. अधिनियम में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 2007 में फिलीपींस में आयोजित दूसरे पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णय को लागू करने का प्रावधान किया गया था. 

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पांचवीं शताब्दी में हुई थी, जिसने दुनिया भर से छात्रों को आकर्षित किया. विशेषज्ञों के अनुसार, 12वीं शताब्दी में आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किए जाने से पहले यह प्राचीन विश्वविद्यालय 800 वर्षों तक फलता-फूलता रहा. नए विश्वविद्यालय ने 14 छात्रों के साथ एक अस्थायी स्थान से 2014 में काम करना शुरू किया. विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य 2017 में शुरू हुआ था.



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