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कंचनजंगा रेल हादसा- खड़गे के मोदी सरकार से 7 सवाल: पूछा- ट्रेन एक्सीडेंट में 4 साल में 1 लाख लोगों की जान गई, जिम्मेदारी किसकी

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सियालदह7 घंटे पहले

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दार्जिलिंग जिले का फांसीदेवा क्षेत्र जहां कंचनजंगा एक्सप्रेस के साथ हादसा हुआ। - Dainik Bhaskar

दार्जिलिंग जिले का फांसीदेवा क्षेत्र जहां कंचनजंगा एक्सप्रेस के साथ हादसा हुआ।

कंचनजंगा ट्रेन हादसे के बाद अब राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने X पर मोदी सरकार से 7 सवाल पूछे हैं। खड़गे ने लिखा कि बालासोर हादसे के बाद भी एक किमी का सुरक्षा कवच क्यों नहीं जोड़ा गया?

कांग्रेस अध्यक्ष ने ये भी लिखा कि NCRB की रिपोर्ट बताती है कि 2017 से 2021 (4 साल) तक रेल हादसों में एक लाख लोगों की जान गई। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सरकार ने रेल बजट का आम बजट में विलय किसी जवाबदेही से बचने के लिए किया था?

हादसे के कारण का पता लगाने के लिए 19 जून को इन्क्वायरी
कंचनजंगा ट्रेन हादसे को लेकर एक महिला पैसेंजर ने मालगाड़ी के दोनों ड्राइवरों (लोको और को-लोको पायलट) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का नाम चिन्मय मजूमदार है। वे कंचनजंगा एक्सप्रेस में बैठी थीं। हादसे में चिन्मय को भी चोटें आई हैं।

चिन्मय ने अपनी शिकायत में लिखा- जब मैं ट्रेन से नीचे उतरी तो देखा कि मालगाड़ी ने कंचनजंगा एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मारी। मालगाड़ी का इंजन बुरी तरह डैमेज हो गया था। हादसा मालगाड़ी के लोको और को-लोको पायलट की लापरवाही से हुआ।

उधर, नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर रेलवे हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए 19 जून को इन्क्वायरी करेगा। ये जांच चीफ कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी जनक गर्ग ADRM चेंबर में करेंगे। इसके लिए हादसे से जुड़े सबूतों को जांच अधिकारी के पास भेजने को कहा गया है। साथ ही कुछ लोगों को बुलाया भी गया है।

रूट की 7 ट्रेनें कैंसिल, 37 ट्रेनें डायवर्ट
फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद कंचनजंगा ट्रेन देर रात करीब 3.15 बजे सियालदह पहुंची। हालांकि, हादसे के कारण इस रूट से जाने वाली 7 ट्रेनों को कैंसिल कर दिया गया। साथ ही, 37 ट्रेनों का रूट डायवर्ट किया गया।

NFR DRM सुरेंद्र कुमार ने कहा- सोमवार रात से लगातार बारिश हो रही थी, फिर भी लाइन को बहाल करने के लिए काम जारी है। लगभग 90% काम हो चुका है, दोपहर तक दोनों ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में 17 जून की सुबह 8:55 बजे एक मालगाड़ी ने कंचनजंगा एक्सप्रेस (13174) को पीछे से टक्कर मार दी थी। रेलवे के मुताबिक इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। जबकि घायल हुए 41 पैसेंजर्स का इलाज चल रहा है।

हादसे के बाद दूसरे दिन की 3 तस्वीरें

कंचनजंगा एक्सप्रेस देर रात 3.15 बजे सियालदह स्टेशन पहुंची।

कंचनजंगा एक्सप्रेस देर रात 3.15 बजे सियालदह स्टेशन पहुंची।

हादसे में घायल लोगों को हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है।

हादसे में घायल लोगों को हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है।

एक्सीडेंट के बाद ट्रैक से क्षतिग्रस्त रेल बोगी का मलबा हटा दिया गया है।

एक्सीडेंट के बाद ट्रैक से क्षतिग्रस्त रेल बोगी का मलबा हटा दिया गया है।

दावा- जब हादसा हुआ, उसके 3 घंटे पहले से सिग्नल खराब था

  • न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक रानीपात्रा रेलवे स्टेशन और छत्तर हाट जंक्शन के बीच ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम सुबह 5.50 बजे से ही खराब था। कंचनजंगा एक्सप्रेस सुबह 8:27 बजे रंगापानी स्टेशन से रवाना हुई और रानीपात्रा स्टेशन से छत्तर हाट के बीच रुकी रही।
  • जब सिग्नलिंग सिस्टम में खराबी आती है तो स्टेशन मास्टर TA-912 रिटन अथॉरिटी जारी करता है। यह ड्राइवर को खराबी के कारण सभी रेड सिग्नल पार करने का अधिकार देता है। रानीपात्रा के स्टेशन मास्टर ने कंचनजंगा एक्सप्रेस को TA-912 जारी किया था। ट्रेन 10 मिनट यहां रुकी रही। 8:42 बजे रंगापानी से निकली मालगाड़ी 8.55 पर कंचनजंगा एक्सप्रेस से भिड़ गई।
  • सूत्रों के मुताबिक, केवल जांच से ही पता चल सकता है कि क्या मालगाड़ी को खराब सिग्नल को तेज गति से पार करने के लिए TA-912 भी दिया गया था या यह लोको पायलट की गलती थी, जिसने डिफेक्टिव सिग्नल नॉर्म का उल्लंघन किया।
  • यदि दूसरी कंडीशन अप्लाई होती है तो रेलवे के नियम के मुताबिक, ड्राइवर को हर डिफेक्टिव सिग्नल पर एक मिनट के लिए ट्रेन को रोकना चाहिए था। इतना ही नहीं, इस दौरान ट्रेन की स्पीड भी 10 किमी प्रति घंटे की होनी चाहिए थी।

घायलों और मरने वालों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घटना में जान गंवाने वाले परिवारों को 10 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 2.50 लाख रुपए और मामूली घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। इसके अलावा हादसे में मारे गए लोगों को प्रधानमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए मदद का ऐलान किया गया है।

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