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विदेश

यहां 24 घंटे स्टार्ट कर रखते हैं कार, गलती से बंद कर दी तो साल भर बाद ही होगी चालू 

Yakutia- World’s coldest village: जिस समय पूरा भारत खासकर उत्तरी क्षेत्र भीषण गर्मी से तप रहा है, दुनिया के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जो हमेशा ठंडे रहते हैं. ऐसा नहीं है कि भारत में ठंडे इलाके नहीं हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड का हमारा पैमाना दुनिया के उन हिस्सों के मुकाबले काफी हल्का है, जहां असल में हड्डियां जमाने वाली सर्दी पड़ती है. रूस के याकुत्स्क नाम के गांव को दुनिया की सबसे ठंडी जगह  माना जाता है, जहां इंसानी आबादी रहती है. यहां का मिनिमम तापमान माइनस 83 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हो चुका है. 

याकुत्स्क गांव साइबेरियाई रेगिस्तान में पड़ता है. इस जगह पर माइनस 40C° तापमान को ‘गर्म’ दोपहर माना जाता है, और माइनस 68C° तापमान सहनीय माना जाता है. यहां लोगों का जीवन डीप फ्रीजर में रहने जैसा है. यहां हर चीज बर्फ और धुएं से ढकी रहती है. यहां रहने वाले लोगों की लाइफस्टाइल काफी चुनौतीपूर्ण है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. याकुत्स्क रूस की राजधानी मॉस्को से 5000 किलोमीटर पूर्व में स्थित है.

24 घंटे ऑन रहती हैं गाड़ियां
ऐसा कहा जाता है कि ये जगह इतनी ठंडी है कि यहां गाड़ियों को 24 घंटे ऑन रखा जाता है. याकुत्स्क जिस कस्बे के तहत आता है उसका नाम ओमाइकॉन है. ठंड के समय यहां का औसत तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक होता है. इस तापमान के दौरान यहां गाड़ियों को कभी बंद नहीं किया जाता है. इसकी वजह भी काफी दिलचस्प है. अगर उन्होंने अपनी गाड़ी बंद कर दी तो उन्हें फिर से चालू करने के लिए गर्मी आने का इंतजार करना पड़ेगा. जाहिर है यह जोखिम कोई लेना नहीं चाहता.

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गर्मी में रहता है -10 तापमान
यहां गर्मियों में तापमान माइनस 5 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. सर्दियों में यहां तापमान माइसन 50 डिग्री सेल्सियस  तक चला जाता है. यदि आप पर्याप्त कपड़ों के बिना बाहर जाते हैं, तो आप बर्फ से जम सकते हैं. यहां सबसे बड़ी समस्या दिनभर चलने वाली ठंडी हवाएं और एक पल में तापमान कम होना है. यहां की सड़कें साल में ज्यादातर समय बर्फ से ढकी रहती हैं. ऐसे मौसम के कारण याकुत्स्क में रहना आसान नहीं है, बल्कि देखा जाये तो यह एक खतरनाक जगह है.

याकुत्स्क में जीवन की दुश्वारियां
याकुत्स्क में सामान्य जिंदगी जीना लगभग असंभव है. यहां के लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भोजन प्राप्त करना है. अब समय के साथ कुछ राहत मिली है, लेकिन यह अब भी कठिन काम है. यहां के लोगों को अब पैकेट वाला फूड उपलब्ध होने लगा है, जो उनके कठिन समय में काम आता है. जब ठंड कम हो जाती है तो रूस की लीना नदी के किनारे बसे इस गांव में मछलियों  दुकानों के बाहर सजा दिया जाता है और वे महीनों ताजा रहती हैं क्योंकि यहां लगातार बर्फ रहती है. मछली यहां के लोगों का मुख्य भोजन है.

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घर को गर्म करना मुख्य काम
भले ही हममे से कई लोगों के लिए यहा कुछ देर बिताना भी बेहद मुश्किल है, लेकिन द सन की रिपोर्ट के अनुसार रूस का याकुत्स्क गांव एक सुंदर जगह है. यहां के लोग सुबह उठने के बाद जो सबसे पहला काम करते हैं वो है लकड़ियों को इकट्ठा करना. फिर उन लकड़ियों को अलाव लगाकर जलाना और घर के वातावरण को रहने लायक बनाना. यहां घर कंक्रीट से ही बनाये जाते हैं, जो बेहद ठंडे मौसम का सामना कर सकें. घरों को बर्फीले नौ महीनों में भारी मात्रा में लकड़ी का उपयोग करके गर्म रखा जाता है.

जब तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है घरों को गर्म करने के अलावा यहां पीने योग्य पानी ढूंढना दूसरा सबसे कठिन काम है. ठंड से बचने के लिए लोग यहां अधिक कपड़े पहनते हैं, जो अक्सर रोएंदार होते हैं, जो गर्म फर से बने हुए हैं. लोगों को मोटे-मोटे जूते पहन कर हर वक्त रहना ही पड़ता है, उनके बिना वे एक पल भी नहीं रह सकते हैं. 

Tags: Cold wave, Commercial Vehicles, Passenger Vehicles, Russia

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