2019 के इस मामले में पीड़ित ने अब एफआईआर दर्ज करवाई है।
एमबीबीएस में नामांकन को लेकर नीट-यूजी के चल रहे विवाद के बीच गुजरात के महेसाणा में होम्यापैथ डॉक्टर के साथ फ्रॉड का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पांच साल पुराने इस मामले में मेहसाणा के निवासी एमबीबीएस की डिग्री के लिए यूपी की एक यूनिवर्सिटी को 16
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2019 के इस मामले में पुलिस ने अब एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने नैनीताल निवासी डॉ. प्रेमकुमार राजपूत, मुरादाबाद निवासी डॉ. शौकत खान और दक्षिण दिल्ली निवासी अरुण कुमार व आनंद कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अब जानिए क्या है पूरा मामला?

एमबीबीएम की पढ़ाई के लिए इंटरनेट पर सर्च करने के दौरान जालसाजों के संपर्क में आए।
पुलिस निरीक्षक जे जी वाघेला ने बताया कि बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएचएमएस) की डिग्री रखने वाले सुरेश पटेल मेडिकल लाइन में उच्च शिक्षा के बारे में इंटरनेट पर सर्च कर रहे थे। तब उन्हें ऑल इंडिया अल्टरनेटिव मेडिकल काउंसिल नाम की एक फोरम का पता चला जो एमबीबीएस की डिग्री दिलवाने का दावा कर रही थी।
वेबसाइट पर मिली डिटेल्स लेकर उन्होंने डॉ. प्रेम कुमार राजपूत नाम के शख्स से फोन पर संपर्क किया। राजपूत ने पटेल को भरोसा दिलवाया कि उन्हें कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर एमबीबीएस की डिग्री मिल जाएगी।
पटेल ने आगे बताया कि मुझे शुरू में संदेह था, लेकिन उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि सब कुछ कानूनी होगा। राजपूत ने पटेल से यह भी कहा कि उन्हें इंटर्नशिप करनी होगी, परीक्षा भी देनी होगी। पांच साल में डिग्री मिल जाएगी। पटेल ने आगे बढ़ने का फैसला किया और 50,000 रुपये का भुगतान किया, जिसके बाद उसे झांसी में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से प्रवेश पत्र मिला।
पटेल ने बताया- राजपूत ने मुझसे करीब 25 बार बात की। उन्होंने मुझे बताया कि तीन अन्य लोग – डॉ. सौकेत खान, डॉ. आनंद कुमार और अरुण कुमार – मुझे एमबीबीएस कोर्स पूरा करने में मदद करेंगे। उनके निर्देश पर, मैंने 10 जुलाई, 2018 से 23 फरवरी, 2019 के बीच 16.32 लाख रुपये का भुगतान किया और अपनी क्लास शुरू होने का इंतजार करने लगा।
क्लास शुरू करने से पहले ही आ गई डिग्री

पीड़ित ने इस बात के पर्याप्त सबूत जुटाए कि आरोपियों ने कई अन्य लोगों को भी ठगा है। इसके बाद मामला दर्ज करवाया।
क्लास शुरू करने से पहले ही मार्च 2019 में मुझे कुरियर से एक पैकेट मिला, जिसमें एमबीबीएस की मार्कशीट, एक डिग्री सर्टिफिकेट, इंटर्नशिप ट्रेनिंग सर्टिफिकेट और मेरे नाम का एक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट था, जिस पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की मुहर लगी हुई थी।
मैंने एमसीआई से संपर्क किया तो पता चला कि मेरे साथ धोखा हुआ है, क्योंकि ये डिग्री फर्जी थी। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसकी जांच बाद में 2019 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
उन्होंने कहा, ‘2019 में मैं मेहसाणा पुलिस टीम के साथ दिल्ली गया, जहां कथित तौर पर डॉ. आनंद कुमार रहते थे और संगठन चलाते थे, लेकिन उनके पते पर कोई नहीं था। बाद में हम दिल्ली में एक निजी बैंक की शाखा में गए और इस बात के पर्याप्त सबूत जुटाए कि आरोपियों ने कई अन्य लोगों को भी ठगा है। इसके बाद जांच ठंडे बस्ते में चली गई। आरोपियों का कभी पता नहीं चला। इस बीच पटेल ने और सबूत जुटाए और इस मामले में पांच साल बाद 14 जून 2024 को एफआईआर दर्ज करवाई।

