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अभी नीट यूजी को लेकर विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा था कि मंगलवार को आयोजित यूजीसी नेट भी निरस्त कर दी गई। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने ही यूजीसी नेट कराया था। इस निर्णय से प्रयागराज में परीक्षा में पंजीकृत 20,543 अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लगी है।
महीनों तैयारी के बाद परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी अपने सही उत्तरों का मिलान ही कर रहे थे कि बुधवार को परीक्षा निरस्त होने के समाचार ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जो पूर्व में नेट कर चुके हैं और जेआरएफ के लिए परीक्षा दी थी। उच्च शिक्षा में करियर तलाश रहे हजारों युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि एनटीए पारदर्शी परीक्षाएं करवाने में पूरी तरह नाकाम रहा है क्योंकि एनटीए खुद अपने आप में कोई संस्था नहीं है बल्कि ढेर सारी प्राइवेट आईटी कंपनियों का समूह है। यह संस्था प्राइवेट कंपनियों की मुनाफाखोरी और नकल माफिया के धन उगाही के मॉडल पर चल रही है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय ने बुधवार को ऐलान किया कि यूजीसी नेट का नए सिरे से आयोजन किया जाएगा। परीक्षा की शुचिता से समझौता होने का मामला सीबीआई को सौंपा जाएगा। शुरुआती जांच में पता चला है कि परीक्षा की पारदर्शिता के साथ समझौता किया गया है इसलिए एनटीए ने परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है।परीक्षा का आयोजन 18 जून 2024 को किया गया था। देशभर के 317 शहरों के 1205 केंद्रों में मंगलवार को आयोजित हुई यूजीसी-नेट परीक्षा के लिए 11.21 लाख से अधिक पंजीकृत उम्मीदवारों में से लगभग 81 प्रतिशत उपस्थित हुए थे। एनटीए ने 83 विषयों में यूजीसी नेट का आयोजन किया था।
