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मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी-2024) के परिणाम में अंकों में अनियमितता और विवाद के बीच परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी परेशान हैं। इनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता है। परीक्षा में बेहतर करने के बावजूद रैंक में पीछे जाने से विद्यार्थी तनाव में हैं। इस समय ऐसी स्थिति है कि अगर फिर से नीट होता है तो शायद कई स्टूडेंट्स अच्छा स्कोर हासिल न कर पाएं, क्योंकि प्रेशर होगा। उनके मन में कई सारे सवाल हैं। अगर फिर से एग्जाम होगा तो रिवीजन एक टास्क होगा। इतने कॉम्पिटिशन में मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी बड़ा टास्क है। वहीं, परीक्षा नहीं होगी तो अच्छे कॉलेज के मिलने की संभावना कम हो गई है। इन सबसे बच्चों में अवसाद बढ़ने लगा है। मनोचिकित्सकों के पास बच्चे अपनी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
रांची के निजी क्लिनिक में पिछले चार-पांच दिन से एक-दो की संख्या में नीट देने वाले छात्र अभिभावकों के साथ समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सक डॉ रवि रोहन ने बताया कि छात्र एनजाइटी और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। छात्र थोड़े डरे हुए हैं। उनका कहना है कि अगर फिर से परीक्षा देनी पड़ी तो पता नहीं इतना रैंक आएगा या नहीं। छात्रों के कॉन्फिडेंस में भी गिरावट दिख रही है। डॉ रवि ने कहा कि उन्हें अभी काउंसिलिंग और अपने लोगों के साथ की जरूरत है।
सामाजिक असुरक्षा की भावना भी
डॉ रवि ने कहा, कई छात्र सामाजिक असुरक्षा के भावना से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि नीट की तैयारी दो-तीन साल से कर रहे हैं, अब अगर नामांकन नहीं हुआ तो आगे क्या होगा। लोगों का सामना कैसे करेंगे। रिश्तेदार-पड़ोसी सवाल कर रहे हैं।
काउंसिलिंग सेल में आ रहे कॉल
चिकित्सकों के अलावा छात्र सीबीएसई बोर्ड की काउंसिलिंग सेल भी फोन कर डिप्रेशन में जाने की बात कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक हफ्ते में हजार से अधिक कॉल आ चुके हैं। अधिकतर छात्र परिणाम में अनियमितता के बाद मानसिक परेशानी की बात कर रहे हैं।
बच्चों में ऐसे लक्षण दिखे तो मनोचिकित्सक से लें सलाह
परिणाम आने के बाद से निराश और अलग-अलग रहना। नींद की कमी, देर तक जागना। चिड़चिड़ापन, दूसरों से कम बात करना, घर से कम निकलना और अचानक से रोना।
