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अरबपति हिंदुजा फैमिली के 4 सदस्‍यों को जेल: प्रकाश, उनकी पत्नी और बेटे-बहू को 4.5 साल तक सजा; स्विट्जरलैंड में नौकरों के शोषण का मामला

जिनेवा10 मिनट पहले

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नम्रता हिंदुजा (बाएं) और अजय हिंदुजा (दाएं से दूसरे) अपने वकीलों के साथ सोमवार (17 जून)  को जिनेवा कोर्ट हाउस पहुंचे थे। - Dainik Bhaskar

नम्रता हिंदुजा (बाएं) और अजय हिंदुजा (दाएं से दूसरे) अपने वकीलों के साथ सोमवार (17 जून) को जिनेवा कोर्ट हाउस पहुंचे थे।

भारतीय मूल के अरबपति हिंदुजा फैमिली के 4 सदस्यों को स्विस कोर्ट ने शुक्रवार (21 जून) को 4 से साढ़े चार साल तक की जेल की सजा सुनाई। बिजनेसमैन प्रकाश हिंदुजा और उनकी पत्नी कमल हिंदुजा को 4 साल और छह महीने की सजा मिली है। कपल के बेटे अजय और उनकी पत्नी नम्रता को 4 साल की सजा मिली।

हिंदुजा परिवार पर अपने नौकरों की तस्करी और शोषण का आरोप लगाया गया था, जिनमें ज्यादातर भारतीय के अशिक्षित लोग थे। ये स्विट्जरलैंड के जिनेवा में झील किनारे स्थित हिंदुजा परिवार के विला में काम करते थे।

हालांकि, कोर्ट ने हिंदुजा परिवार के सदस्यों पर लगे मानव तस्करी के आरोपों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उनके स्टाफ को इतनी समझ थी कि वे क्या कर रहे हैं। मामले में पांचवें आरोपी और ह‍िंदुजा पर‍िवार के मैनेजर को 18 महीने की सजा सुनाई गई है।

तस्वीर 17 जून की है। जिनेवा में कोर्ट के बाहर आते अजय हिंदुजा और उनकी पत्नी नम्रता हिंदुजा।

तस्वीर 17 जून की है। जिनेवा में कोर्ट के बाहर आते अजय हिंदुजा और उनकी पत्नी नम्रता हिंदुजा।

हिंदुजा परिवार पर स्टाफ से ज्यादा कुत्तों पर खर्च करने का आरोप
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, स्विटजरलैंड में सोमवार (17 जून) से हिंदुजा परिवार के खिलाफ मानव तस्करी के मामले में ट्रायल शुरू किया गया था। एक सरकारी वकील ने कोर्ट में आरोप लगाया था कि हिंदुजा अपने स्टाफ से अधिक अपने कुत्तों पर खर्च करते हैं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अरबपति परिवार ने अपने स्टाफ के पासपोर्ट तक जब्त कर लिए थे। वे अपने स्टाफ को करीब 18 हजार रुपए महीने देते थे। ये पैसे उन्हें भारतीय रुपए में दिए जाते थे, जिसका वे स्विट्जरलैंड में इस्तेमाल भी नहीं कर पाते थे।

स्टाफ को नौकरी छोड़ने की इजाजत नहीं थी
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी वकील ने कोर्ट में ये दावा किया कि हिंदुजा फैमिली के विला में कर्मचारियों के लिए न तो काम के घंटे तय हैं और न ही उनकी साप्ताहिक छुट्टी का कोई तय समय है। वे 18-18 घंटे लगातार काम करते हैं। इन्हें न नौकरी छोड़ने की इजाजत है और न घर से बाहर निकलने की परमिशन।

हिंदुजा फैमिली ने आरोपों का किया खंडन
हालांकि, हिंदुजा फैमिली ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने कहा कि वे खुद स्टाफ की हायरिंग नहीं करते थे। भारत की एक कंपनी उनकी हायरिंग करती है। इसलिए उन पर मानव तस्करी और शोषण के आरोप गलत हैं।

इसके साथ ही हिंदुजा फैमिली ने दावा किया था कि सरकारी वकीलों ने मामले की पूरी सच्चाई नहीं बताई है। उनके विला में स्टाफ के लिए भोजन की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। उनके रहने के लिए घर भी दिया गया था।

हिंदुजा फैमिली के वकील ने कोर्ट में दावा किया कि उनके कई स्टाफ भारत जाने के बाद फिर से स्विटजरलैंड में काम करने के लिए लौटे हैं। अगर उन्हें यहां दिक्कत हुई होती तो वे फिर से यहां काम करने क्यों आते।

ब्रिटेन में सबसे अमीर हैं हिंदुजा
हिंदुजा फैमिली ब्रिटेन से अपना कारोबार चलाती है। ये फैमिली दुनिया के सबसे रईस लोगों की लिस्ट में शामिल है। फोर्ब्स के अनुसार, 2023 में हिंदुजा परिवार की कुल संपत्ति 20 बिलियन डॉलर थी। हिंदुजा ब्रिटेन में सबसे धनी फैमिली है।

हिंदुजा फैमिली के गोपी हिंदुजा ब्रिटेन के सबसे रईस शख्स हैं। वे दुनिया के टॉप 200 अमीर लोगों की सूची में शामिल हैं। हिंदुजा ग्रुप का कारोबार टेलीकॉम, ऑइल एंड गैस, पावर एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिएलिटी, ऑटो, हेल्थकेयर आदि सेक्टर्स में है।

110 साल पहले हिंदुजा ग्रुप की रखी गई नींव
हिंदुजा ग्रुप की नींव परमानंद दीपचंद हिंदुजा ने 1914 में मुंबई में रखी थी। उनके चार बेटे हुए। इन्हीं चारों बेटों का परिवार हिंदुजा ग्रुप को मैनेज करता है। पारिवारिक बिजनेस को फिलहाल चार हिंदुजा भाइयों द्वारा मैनेज किया जाता है – श्रीचंद, गोपीचंद, प्रकाश, और अशोक। पिछले साल 17 मई को श्रीचंद हिंदुजा का निधन हो गया था।

हिंदुजा ग्रुप का ऑफिस 1919 में ईरान में शिफ्ट हो गया था। इसके बाद 1979 तक हिंदुजा ग्रुप का कारोबार वही से होता रहा। साल 1979 में ईरान के इस्लामिक क्रांति के बाद वहां की हालात बदल गए जिसके बाद हिंदुजा ग्रुप को लंदन ले शिफ्ट होना पड़ा। हिंदुजा ग्रुप का कारोबार करीब 50 देशों में फैला है और इसमें डेढ़ लाख से भी अधिक कर्मचारी काम करते हैं। भारत में इस ग्रुप की छह लिस्टेड कंपनियां हैं।

बोफोर्स घोटाले से भी जुड़ा था नाम
श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाश हिंदुजा का नाम बोफोर्स घोटाले में भी सामने आया था। इस घोटाले में स्वीडिश कंपनी बोफोर्स पर यह आरोप लगाया गया कि उसने 1986 में भारत सरकार को 1.3 अरब डॉलर की रिश्वत दी थी। इसमें तीनों भाइयों ने मदद की थी। तीनों भाइयों पर CBI ने अक्टूबर 2000 में ये आरोप लगाए थे, मगर साल 2005 में दिल्ली की कोर्ट ने सबूत के अभाव में उन पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया।

परमानंद दीपचंद हिंदुजा के चारों बेटों की तस्वीर। कुर्सी पर बैठे सबसे बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा का पिछले साल निधन हो गया था।(फाइल)

परमानंद दीपचंद हिंदुजा के चारों बेटों की तस्वीर। कुर्सी पर बैठे सबसे बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा का पिछले साल निधन हो गया था।(फाइल)

हिंदुजा परिवार का अनोखा नियम
चार साल पहले हिंदुजा फैमिली में अनबन की खबरें भी सामने आई थीं। दरअसल इसकी वजह इस परिवार में 2014 में हुआ एक समझौता था। समझौते के मुताबिक ‘हिंदुजा ग्रुप की प्रॉपर्टी पर सबका हक है, और कुछ भी किसी का नहीं है।’

मतलब हिंदुजा परिवार के एक भाई के पास जो दौलत है उसपर बाकी भाईयों का भी अधिकार होगा। प्रत्येक व्यक्ति दूसरों को अपने एक्जीक्यूटर के रूप में नियुक्त करेगा। इस समझौते पर चारों भाईयों ने दस्तखत किए थे। लेकिन बाद में हिंदुजा फैमिली के सबसे बड़े सदस्य श्रीचंद हिंदुजा की बेटियों ने इस समझौते से बाहर निकलना चाहा था। इसके लिए उन्होंने कोर्ट में अर्जी भी दी थी।

श्रीचंद हिंदुजा की बेटियों ने आरोप लगाया था कि उनके चाचाओं ने उन्हें परिवार से अलग-थलग कर दिया है। उन्हें आर्थिक रूप से बेहद कमजोर कर दिया है। वही, श्रीचंद हिंदुजा के अन्य भाईयों ने इन दो बहनों पर सारी संपत्ति हथियाने का आरोप लगाया था।

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