
समाजवादी पार्टी के सांसद आर के चौधरी ने स्पीकर और प्रोटेम स्पीकर को एक चिट्ठी लिखकर मांग किया संसद से सेंगोल को हटाया जाए। उन्होंने चिट्ठी में कहा कि सेंगोल राजा-महाराजाओं का प्रतीक है, इसे संसद से हटा देना चाहिए।
एक बार फिर मचा सियासी बवाल। सेंगोल को लेकर सपा सांसद की चिट्ठी ने मचाया सियासी बवाल। अब इस पर कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उधर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपने सांसद के बचाव में उतर आए हैं।
संसद से सेंगोल हटाए जाने के सवाल पर सपा के मुखिया अखिलेश ने कहा- मुझे लगता है हमारे सांसद इसलिए कह रहे होंगे कि जब संसद में पहली बार सेंगोल लगा था तो प्रधानमंत्री जी ने प्रणाम किया था। इस बार शपथ लेते हुए वह भूल गए, इसी को याद दिलाने के लिए पार्टी के सांसद ने पत्र लिखा है।इधर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा- जब सेंगोल संसद में स्थापित हुआ था तो उस वक्त भी समाजवादी पार्टी संसद में थी, उस वक्त उनके सांसद क्या कर रहे थे?सेनगोल पर सपा सांसद आर.के. चौधरी की टिप्पणी पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा, ‘उन्होंने क्या सोचा है कि रोज कुछ ऐसी बात बोलें जिससे हम चर्चा में आ जाएं। इन बातों का कोई अर्थ नहीं है।’
सेंगोल किया है ?
सेंगोल एक हस्तनिर्मित, सोने की परत चढ़ा हुआ राजदंड है जो लगभग पाँच फीट (1.5 मीटर) लंबा है, और इसका व्यास ऊपर से लगभग तीन इंच (76 मिमी) और नीचे से एक इंच (25 मिमी) है। इसमें एक लकड़ी का डंडा लगा होता है और न्याय और मजबूती का प्रतीक एक बैठा हुआ नंदी इसके ऊपर होता है।

