Raksha Bandhan 2024: वैसे तो रक्षाबंधन के पर्व को लेकर कई प्रथाएं प्रचलित हैं. ऐसे में अयोध्या के ज्योतिष ने बताया कि यह प्रथा कैसे शुरूआत हुई. इस प्रथा शुरू होने को उन्होंने दो बातें बताई. आईये जानते हैं प्रथा के बारे में…
रक्षाबंधन का पर्व भाई बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक माना जाता है. प्रत्येक वर्ष सावन माह की पूर्णिमा तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधती हैं और अपने भाई की लंबी दीर्घायु के लिए भगवान से प्रार्थना भी करती है. भाई इसके बदले में बहन की रक्षा का वचन देते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि रक्षाबंधन की शुरुआत कहां से और कैसे हुई थी.
इस पर्व को लेकर कई कथाएं हैं प्रचलित
इस सवाल का जवाब जानने के लिए चलिए इस रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर कैसे हुई रक्षाबंधन की शुरुआत? अगर धार्मिक पुराणों में वर्णित कथाओं की बात करें तो इस सवाल के जवाब में एक प्रचलित कथा सामने आती है. उस कथा के अनुसार रक्षाबंधन की शुरूआत एक पति और पत्नी से शुरू हुई है.
देवराज इंद्र की पत्नी से मानी जाती है शुरूआत
दरअसल, भविष्य पुराण के मुताबिक एक बार असुर और देवताओं में भयंकर युद्ध हो रहा था. उस दौरान देवताओं की सेना पर असुर की सेना भारी पड़ रही थी. इसके बाद देवताओं की सेना असुर से पराजित होने लगी. इसे देखने के बाद देवराज इंद्र की पत्नी देखने के बाद घबराने लगी. काफी सोच विचार के बाद इंद्रदेव की पत्नी शचि ने घोर तप और तपस्या किया. जिसके फलस्वरुप उन्हें एक रक्षा सूत्र की प्राप्ति हुई. इसके बाद यह रक्षा सूत्र शचि ने अपने पति इंद्र की कलाई पर बांध दिया. जिसके बाद देवताओं की शक्ति बढ़ जाती है और राक्षस पराजित हो जाते हैं.
अयोध्या के ज्योतिष ने बताया
इतना ही नहीं अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि रक्षाबंधन को लेकर कई कथा धार्मिक ग्रंथो में प्रचलित हैं. जब इंद्र की पत्नी ने इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा तो उस दिन सावन की पूर्णिमा तिथि थी और तभी से इस पवित्र बंधन यानी की रक्षा बंधन की परंपरा की शुरुआत हुई
वहीं, रक्षाबंधन की परंपरा को लेकर और भी कथा प्रचलित हैं, कहा जाता है कि महाभारत में जब भगवान श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब द्रौपदी ने साड़ी का आंचल फाड़ कर भगवान श्री कृष्ण के हाथों में बंधा था, कहा जाता है तभी से रक्षाबंधन की शुरूआत भी हुई थी.

