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सीबीएसई 12वीं के हजारों विद्यार्थियों के सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षा के अंक में काफी अंतर मिले हैं। सीबीएसई ने संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी किया है। इनमें बिहार के 654 स्कूल शामिल हैं। इनके 14 हजार से अधिक छात्रों के सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षा के अंक में काफी अंतर है। सीबीएसई ने इसकी समीक्षा करने का निर्देश दिया है। बता दें कि इस बार बिहार से 60 हजार के लगभग छात्र 12वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे। बोर्ड अधिकारियों की मानें तो यह हाल केवल बिहार नहीं बल्कि देशभर के सैकड़ों स्कूलों का है। बड़ी संख्या में छात्रों को प्रायोगिक परीक्षा में सौ फीसदी और सैद्धांतिक में 50 फीसदी अंक मिले हैं।
स्कूलों की खुली पोल
सीबीएसई की ओर से प्रायोगिक परीक्षा एक से 14 फरवरी तक ली गयी थी। इसके तुरंत बाद प्रायोगिक परीक्षा के अंक विषय वार बोर्ड को भेजना होता है। प्रायोगिक परीक्षा के लिए बोर्ड द्वारा एक्सटर्नल भी नियुक्त किये जाते हैं। एक्सटर्नल की नियुक्ति दो स्कूल आपस में मिल कर करते हैं। प्रायोगिक परीक्षा के अंक देने में अब स्कूलों की पोल खुल रही है। रिजल्ट के बाद बोर्ड ने स्कूलों की लापरवाही एआई (आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस ) की मदद से पकड़ी है।
मुजफ्फरपुर के पांच ऐसे स्कूल हैं जिनके दो हजार छात्रों को भौतिकी और रसायन शास्त्रत्त् में 70 में 40 से 50 अंक मिले। वहीं प्रायोगिक परीक्षा में इन छात्रों को 30 में से 30 अंक मिले। इन स्कूलों को बोर्ड ने नोटिस जारी किया है।
बाइपास स्थित एक स्कूल से 230 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। 203 को प्रायोगिक में 30 में से 30 तो सैद्धांतिक परीक्षा में 70 में 50 से 55 अंक प्राप्त हुए। भौतिकी, रसायन शास्त्रत्त् दोनों ही विषय में यही स्थिति देखने को मिली।
