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यूजीसी के वर्ष में दो बार दाखिला देने के निर्णय पर राजधानी के विश्वविद्यालयों के प्रमुखों की अलग-अलग राय है। इसे लागू करने को लेकर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन कुछ शिक्षक प्रतिनिधियों ने मूलभूत सुविधाएं, नियुक्तियां और धन की उपलब्धता पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह का कहना है कि यह एक सकारात्मक कदम है। यूजीसी जैसा निर्देश देगी वैसा करेंगे। हम लोग पहले से पीएचडी दाखिला साल में दो बार लेते हैं। पश्चिमी देशों में सितंबर और जनवरी में दाखिले होते हैं, लेकिन अधिकांश सितंबर में होते हैं। हम अपने यहां भी पहले विभागों से यह शुरू कर सकते हैं और देखेंगे कि किस तरह का रिस्पांस आता है। यह एक टेस्टेड फार्मूला है। ऐसा नहीं है कि नया प्रयोग है।
वहीं, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ (आईपी) विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महेश वर्मा ने कहा कि वह इसी सत्र से चयनित पाठ्यक्रमों के लिए नई प्रवेश प्रणाली को लागू करने का प्रयास करेंगे और अगले सप्ताह होने वाली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की बैठक में इसके लिए प्रस्ताव पेश करेंगे। यह सभी के लिए फायदेमंद है। एक ओर जहां अतिरिक्त समय चाहने वाले छात्रों को प्रवेश के दूसरे दौर में आवेदन करने का अवसर प्रदान करेगा, वहीं विश्वविद्यालय अपने संसाधनों का चौबीसों घंटे उपयोग करके राजस्व उत्पन्न करने में भी सक्षम होंगे, जो अन्यथा प्रवेश के समय निष्क्रिय हो जाते हैं। हम इसको लागू करने को लेकर उत्साहित हैं।
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पहले प्रयोगात्मक आधार पर शुरू करेंगे अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली (एडीयू ) की कुलपति अनु सिंह लाठर का कहना है कि विश्वविद्यालय अगले साल से कुछ पाठ्यक्रमों के लिए प्रयोगात्मक आधार पर इस प्रणाली को लागू कर सकता है। यह यूजीसी द्वारा उठाया गया एक स्वागत योग्य कदम है। यह प्रणाली पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित है। हम जल्द ही या बाद में इस प्रणाली को लागू करने का प्रयास करेंगे। वर्तमान में, हम बुनियादी ढांचे के मुद्दों से जूझ रहे हैं और इस प्रणाली को लागू करने के लिए हमें अतिरिक्त स्थान, कर्मचारियों और साथ ही शिक्षण संकाय की आवश्यकता होगी।
इसे लागू करने में ये मुश्किलें आएंगी
दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक संगठन डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट की पदाधिकारी प्रो. आभा देब हबीब का कहना है कि इसको लागू करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने इसको लेकर कुछ कारण बताएं हैं जो निम्न प्रकार से हैं…
– बिना अतिरिक्त मूलभूत सुविधाएं दिए इसे शुरू करना मुश्किल
– सीयूईटी के बाद भी डीयू सहित अन्य विश्वविद्यालयों में सीटें नहीं भर पा रही
– शिक्षकों और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की संख्या भी ओबीसी और ईडब्ल्यूएस सीटें बढ़ाने के बाद उस अनुपात में नहीं बढ़ी
– सेमेस्टर सिस्टम के कारण शिक्षक साल में पढ़ाने के अलावा दो बार परीक्षा कराने और कापी चेक करने का काम करता है। इससे बोझ बढ़ेगा
– बिना वर्कलोड का मूल्यांकन किए इसे लागू करना मुश्किल
वैधानिक निकायों से अनुमति के बाद फैसला जामिया
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कार्यवाहक कुलपति प्रो. मोहम्मद शकील का कहना है कि यह मामला विश्वविद्यालय की आगामी कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा जाएगा। इस बारे में कार्यकारी परिषद के सम्मानित सदस्यों द्वारा निर्देश प्राप्त किए जाएंगे कि यूजीसी ने वर्ष में दो बार प्रवेश के संबंध में जो घोषणा की है, उसे किस प्रकार लागू किया जाए। यूजीसी द्वारा कही गई बातों को कुलपति अपने आप लागू नहीं कर सकते, इसके लिए उन्हें विश्वविद्यालय के वैधानिक निकायों से अनुमोदन लेना चाहिए होता है।
