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यूजीसी नेट परीक्षा रद्द करने के एक दिन बाद गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार किसी के भी खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएगी। मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोविंद जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रीय साइबर अपराध इकाई से कुछ इनपुट मिले थे जिससे यूजीसी नेट परीक्षा में गड़बड़ी होने का शक हुआ। संदेह होने पर परीक्षा रद्द करने का फैसला किया गया। एग्जाम में गड़बड़ी होने की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। नई एग्जाम डेट का ऐलान जल्द ही होगा।
गोविंद जायसवाल ने कहा, ‘एनटीए भी नई एजेंसी है। 2019 से काम कर रही है। चार साल का अनुभव है। वो एक करोड़ से ज्यादा छात्रों का एग्जाम करा रही है जो दुनिया भर में दूसरा सबसे बड़ा नंबर है। पहले नंबर पर चीन का गाकाओ एग्जाम है जिसमें सर्वाधिक स्टूडेंट्स बैठते हैं। इतने बड़े एग्जाम को कराने में हम विभिन्न हितधारकों, खासतौर पर छात्रों से इनपुट लेते हैं। बाद में एनटीए इस मामले की प्वॉइंट वाइज डिटेल देगा। हमारे लिए छात्र हित सर्वोपरि है। हम सभी चाहते हैं कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो, अगर डिटेल्स को ज्यादा सार्वजनिक किया गया तो इससे जांच प्रभावित होगी। इसलिए इस समय परीक्षा रद्द करने से जुड़ी डिटेल्स फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जा सकती।’
11 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा
देशभर के 317 शहरों में मंगलवार को यह परीक्षा एनटीए ने आयोजित की थी। इसमें 11.21 लाख से अधिक पंजीकृत उम्मीदवारों में से लगभग 81 प्रतिशत उपस्थित हुए थे। नेट जून और दिसंबर में आयोजित किया जाता है।
नीट पर क्या बोला
जायसवाल ने कहा, ‘नीट में कई मुद्दे थे। एक ग्रेस मार्क का मुद्दा था। दूसरा आरोप है कि बिहार में कुछ हुआ, जिसकी जांच चल रही है। तीसरा, गुजरात से कुछ गड़बड़ी का आरोप था। ये तीन अलग-अलग तरह के मुद्दे हैं। ग्रेस मार्क का मुद्दा पूरी तरह से हल हो गया है। दूसरा बिहार में कथित लीक का मुद्दा है, आर्थिक अपराध शाखा पहले से ही जांच कर रही है। उन्होंने बहुत सारी जानकारी मांगी है और एनटीए ने भी जानकारी दी है।’
